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एक नई लग्जरी कार का बाजार में उतरना

महेंद्र राजा जैन वरिष्ठ हिंदी लेखक

रोल्स रॉयस की छवि अभी तक शोफर द्वारा चलाई जाने वाली संपन्न लोगों की लग्जरी कार के रूप में रही है। अपनी इस छवि से छुटकारा पाने के लिए उसने पिछले तीन वर्षों से प्रतीक्षित अब जो एक नया मॉडल निकाला है, वह प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार,  नवधनाढ्यों और उनके वयस्क बच्चों के लिए है। पर इसकी कीमत दो लाख पचास हजार पौंड (लगभग दो करोड़ 40 लाख रुपये) देखकर समझा जा सकता है कि कौन लोग यह कार लेना पसंद करेंगे? रोल्स रॉयस की इस नई कार का नाम दुनिया के सबसे बड़े और अत्यंत ही दुर्लभ कच्चे हीरे ‘क्लीनन’ के नाम पर रखा गया है। अत्यंत ही दुर्लभ 3106 कैरट वाला यह हीरा दक्षिण अफ्रीका की एक खदान में 1905 में पाया गया था। कार का नाम इस हीरे के समान चरम वैभव का प्रतीक है। 

रोल्स रॉयस ने पहली बार अपना लक्ष्य ऐसे युवाओं पर रखा है, जिनके पास अकूत संपदा है और जो अपनी पसंद की चीज पर अधिक से अधिक खर्च करने में नहीं हिचकिचाते। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ऐसे अधिकांश लोग अपने करियर में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं और निश्चित रूप से रोल्स रॉयस चाहते हैं। इस कार की खासियत यही है कि इसमें विलासिता की हर सुविधा मौजूद है। यहां तक कि इसकी सीटों में ही मालिश के उपकरण भी लगे हैं। लगभग सारी सुविधाएं ऑटोमेटिक हैं। स्वाभाविक ही कलिनन शोफर द्वारा ही चलाई जाएगी। अत: रोल्स रॉयस ने पिछली सीटों को अधिक से अधिक आरामदायक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 150 मील प्रति घंटे रफ्तार वाली यह कार 4-5 सेकंड के अंदर 0.62 मील प्रति घंटे के रफ्तार पकड़ लेगी। 5.3 मीटर लंबी और 2.1 मीटर चौड़ी यह कार पांच लीटर पेट्रोल में 19 मील चलती है। इंजन, सस्पेंसन और गीयर बॉक्स को रेत, बर्फ, बरसात और ऊबड़-खाबड़ सभी प्रकार की सड़कों के अनुसार एक बटन दबाते ही सेट किया जा सकता है। आधा मीटर पानी भरी सड़क पर भी यह कार बिना आपके कीमती इटालियन जूते खराब किए आसानी से चल सकती है, यानी इसमें ‘एवरिव्हेयर मोड’ लगाया गया है। कार में चार कैमरे लगे हैं और कांच की छत है, जिनसे बाहर के दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है। कारों के मामले में इसे विलासिता का उत्कर्ष कहा जा सकता है। वैसे रोल्स रॉयस ने इसे ऐसी ‘वीक एंड’ कार बतलाया है, लेकिन इसका उपयोग प्रतिदिन किया जा सकता है।

इस कार की कीमत अधिकांश धनपतियों की पहुंच से बाहर ही कही जा सकती है। 1980 से 1996 के बीच यूरोपीय देशों में जन्मे ऐसे अधिकांश लोग 30 वर्ष की उम्र तक किराए के मकानों में रहते हैं, भले ही किराया लाखों रुपये महीना हो। ब्रिटिश अखबार ‘इंडिपेंडेंट’ के एक सर्वे के अनुसार लंदन में रहने वाले सभी वर्गों के सभी उम्र के अतिधनाढ्य लोगों की पहली आवश्यकता  मकान लेने की होती है। आज धनपतियों के बेटों को अपने पिता की अपेक्षा अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 
बहरहाल, कलिनन उन नवधनाढ्य के गैरेजों में पहुंचाने लगी हैं, जिन्होंने उसे लांच किए जाने के पहले ही बुकिंग करा ली थी। जहां तक भारतीयों की बात है, अभिनी सोहन पहली भारतीय ग्राहक हैं, जिन्होंने यह कार बुक कराई है। दुबई में एरीज ग्रूप के संस्थापक सोहन राय ने यह कार अपनी शादी की 25 वीं वर्षगांठ पर अपनी पत्नी को देने के लिए पसंद की थी। रोल्स रॉयस की सभी कारें ऑर्डर देकर ग्राहकों की आवश्यकतानुसार विशेष रूप से तैयार कराई जाती हैं। अत: उनके तैयार होने में काफी समय लग जाता है। कोई भी कार स्टॉक से नहीं खरीदी जा सकती, वस्तुत: स्टॉक होता ही नहीं। रोल्स रॉयस को विश्वास है कि कुछ अन्य देशों के समान भारतीय बाजार में भी यह कार सफल रहेगी। हालांकि रोल्स रॉयस सीरीज की कारें में कलिनन सबसे मंहगी कार नहीं है। लग्जरी कार के बारे में यह माना जाता है कि वे बाजार या उपभोक्ताओं की किसी जरूरत को पूरा करने के लिए नहीं बनाई जातीं, बल्कि कुछ लोगों की शान बढ़ाने का एक साधन भर होती हैं। इस छोटे से बाजार की कमाई बहुत मोटी होती है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Mahendra Raja Jain article in Hindustan on 30 august