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इंसानी दिमाग में लगने लगे चिप तो बदल जाएगी दुनिया

यह न्यूरलचिप लोगों को उनकी यादों को संभालकर रखने, यानी स्मार्टफोन की तरह ही बैकअप मेमोरी बनाने का मौका देगी। सिक्के जैसी एक डिवाइस या यंत्र ‘न्यूरलचिप’ को अपने मस्तिष्क से जोड़कर आप वह सब कुछ कर सकते..

इंसानी दिमाग में लगने लगे चिप तो बदल जाएगी दुनिया
Pankaj Tomarनिरंकार सिंह, पूर्व सहायक संपादक, हिंदी विश्वकोषWed, 31 Jan 2024 11:18 PM
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विज्ञान हमें बार-बार चकित करता है? नए-नए आविष्कारों ने मानव जीवन को सरल बनाने में ऐसे-ऐसे बदलाव किए हैं कि जिनकी कुछ दशक पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। सिक्के जैसी एक डिवाइस या यंत्र ‘न्यूरलचिप’ को अपने मस्तिष्क से जोड़कर आप वह सब कुछ कर सकते हैं, जो अब तक कंप्यूटर, लैपटॉप और एंड्रॉयड फोन पर लिखकर या बोलकर करते रहे हैं। यह कमाल एलन मस्क की कंपनी ने किया है। यह सिक्का बराबर यंत्र चुटकियों में दिमाग का हिस्सा बन जाएगा। लगवाने वाले को पता भी नहीं चलेगा कि यह कब लग गया। पहले केवल कहा जाता था कि इंसानों के दिमाग में चिप लगाई जाएगी, पर एलन मस्क की कंपनी ने इसे सच कर दिखाया है।
यह दुनिया के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि एलन मस्क के स्टार्टअप न्यूरालिंक ने मानव मस्तिष्क में अपना पहला सफल चिप लगा दिया है। इस तकनीक से केवल सोचने भर से कई यंत्र काम करने लगेंगे। न्यूरालिंक ने इंसान के दिमाग में सर्जरी के जरिये चिप लगाई है। यह यंत्र मानव के दिमाग और कंप्यूटर के बीच सीधे संपर्क स्थापित करेगा। अगर मानव पर प्रयोग कामयाब रहा, अगर मानव अनियंत्रित न हुआ, चिप का कोई प्रतिकूल असर सामने न आया, तो तय मानिए, दुनिया बदल जाएगी। दृष्टिबाधित लोग देखने लगेंगे। कमजोर दिमाग के लोग भी विद्वान रूप में देखे जाएंगे। लकवा के मरीज चल-फिर सकेंगे और कंप्यूटर भी चला सकेंगे। कंपनी ने इस चिप का नाम ‘लिंक’ रखा है।
सितंबर 2023 में मस्क की कंपनी को मानव पर प्रयोग करने की मंजूरी मिली थी। न्यूरालिंक के मुताबिक, प्रयोग या परीक्षण उन लोगों पर किया जा रहा है, जिनको सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड में चोट या क्वाड्रिप्लेजिया है। इस परीक्षण में हिस्सा लेने वालों की उम्र कम से कम 22 साल होनी चाहिए। वैसे एक अनुमान यह है कि परीक्षण को पुख्ता होने में छह साल तक लग जाएंगे। 
एक ऐसे ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस को डिजायन किया जा रहा है, जो आसानी से प्रत्यारोपित होकर दिमाग के प्राकृतिक तत्वों-द्रव्यों के साथ तालमेल बिठा लेगा, जो किसी भी कंप्यूटर या मोबाइल के संचालन में सक्षम होगा। मस्क यह भी कह चुके हैं कि आने वाले समय में लोगों को अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के लिए बोलने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। कुछ सोचते ही यह यंत्र काम करने लगेगा। आसान शब्दों में कहा जाए, तो टेलीपैथी, यानी दिमाग की सोच के सहारे स्मार्टफोन और कंप्यूटर को ऑपरेट किया जा सकेगा। 
क्या इस चिप की मदद से हम अपनी तमाम यादों को सहेजे रख सकते हैं? एलन मस्क ने तो पिछले साल ही दावा कर दिया था कि यह न्यूरलचिप लोगों को उनकी यादों को संभालकर रखने यानी स्मार्टफोन की तरह ही बैकअप मेमोरी बनाने का मौका देगी। इस चिप के जरिये लोगों की याददाश्त को भी बढ़ाया जा सकेगा। हालांकि, इस चिप यंत्र के दुरुपयोग की गुंजाइश भी बहुत है। अगर किसी विद्यार्थी को यह चिप लग जाए, तो परीक्षा का अर्थ ही बदल जाएगा और अगर अपराधी लगा ले, तो कितना खतरनाक हो जाएगा? हां, इतना जरूर है कि पुलिस को सुविधा हो जाएगी और आने वाले समय में शायद ही कोई कभी गुम हो पाएगा। साथ ही, इस चिप के सफल होने के बाद शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति बचेगा, जो इस चिप का लाभ न लेना चाहे। भला कौन नहीं चाहेगा अपनी तमाम यादों को संजोना? स्मृतिदोष से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इससे काफी मदद मिलेगी। 
न्यूरलचिप दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है। मस्क इंसानी दिमाग में कंप्यूटर इंटरफेस प्लांट कर इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ने की भी चाहत रखते हैं।  
न्यूरालिंक ने पहले बंदरों पर इसका परीक्षण किया था और यह उनमें अच्छे से काम कर रहा है। इस चिप को लगाना और निकालना आसान है। 9 अप्रैल, 2021 को एलन मस्क ने बताया था कि न्यूरालिंक की इस चिप की मदद से एक बंदर आसानी से पोंग नाम का आर्केड गेम खेलना सीख गया था। वाकई, अगर यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा, तो इंसान न जाने क्या-क्या काम करने में सक्षम हो जाएगा?  
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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