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भारतीय फुटबॉल मैदान से सुनील छेत्री की विदाई

भारत के लिए सर्वाधिक 94 गोल करने वाले फुटबॉल खिलाड़ी सुनील छेत्री ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है और उसके बाद उनके नाम की चर्चा फुटबॉल की दुनिया में ही नहीं, पूरे देश में तेज हो गई है। लंबे समय तक...

भारतीय फुटबॉल मैदान से सुनील छेत्री की विदाई
Monika Minalअनादि बरुआ, पूर्व फुटबॉलर एवं कोचThu, 16 May 2024 09:53 PM
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भारत के लिए सर्वाधिक 94 गोल करने वाले फुटबॉल खिलाड़ी सुनील छेत्री ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है और उसके बाद उनके नाम की चर्चा फुटबॉल की दुनिया में ही नहीं, पूरे देश में तेज हो गई है। लंबे समय तक राष्ट्रीय टीम के कप्तान रहे सुनील लगभग दो दशक तक भारतीय फुटबॉल का सबसे चमकदार चेहरा हैं। वह दुनिया में सर्वाधिक गोल करने वाले सर्वश्रेष्ठ चार फुटबॉलर में शुमार हैं। आने वाले दिनों में भारतीय टीम में उनकी कमी बहुत खलेगी और युवाओं के लिए वह आने वाले दशकों में प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। 
सुनील छेत्री को मैं तब से जानता हूं, जब वह आर्मी पब्लिक स्कूल, धौलाकुआं में पढ़ा करते थे। वहां से वह खेलते-खेलते ममता मॉडल स्कूल गए। तब मैं फुटबॉल टीम चयनकर्ता भी था, सुब्रतो कप के लिए टीम चुनता था। सुनील का खेल देखकर मैं तब दूसरे चयनकर्ताओं से कहता था, यह लड़का बड़ा खिलाड़ी बनेगा। सुनील के मम्मी-पापा भी वहां बैठकर मैच देखते थे और मुझे याद है, मैं उनके सामने भी सुनील की तारीफ करता था। गौर करने की बात है कि सुनील की मम्मी भी कुशल फुटबॉलर रही  हैं और गेंद को पैरों पर लगातार घुमाने और नियंत्रित करने में माहिर हुआ करती थीं। ऐसे में, सुनील को संस्कार में ही फुटबॉल नसीब हुई।  
मैं दिल्ली का भी फुटबॉल कोच रहा हूं, तो मैंने यहां लगभग हर खिलाड़ी को खेलते-बढ़ते देखा है। इन सभी खिलाड़ियों में सुनील छेत्री सबसे खास हैं। मैंने उन्हें प्रशिक्षित भी किया है। इस मेहनती खिलाड़ी में सबसे अच्छा गुण है अनुशासन। वह किसी अच्छी चीज को जल्दी सीख लेते हैं। एक बार हम फरीदाबाद में टूर्नामेंट खेल रहे थे। एक दिन मैच होता था और एक दिन आराम। आराम वाले दिनों में खिलाड़ी गप मारने बैठ जाते थे। एक दिन मैंने सुनील से कहा, ऐसे समय मत खराब करो, आओ, तुम्हें एक खेल सिखाता हूं। तब मैंने उन्हें कमरे के अंदर ही बॉल से ‘लेग टेनिस’ का अभ्यास करना सिखाया। कमरे के अंदर ही इस खेल में सुनील और बाकी खिलाड़ियों को बहुत आनंद आया। तब संतोष ट्रॉफी खेल रहे सभी खिलाड़ियों ने कहा कि हम अपने घर में भी ऐसे खेलने की कोशिश करेंगे, इससे खेल कौशल व चपलता में भी मदद मिलेगी। 
सुनील अनुशासन के पक्के हैं। चीजों को बहुत सहेजकर, करीने से रखते हैं। जब वह अपने खेल में उत्कर्ष पर थे, तब मैं उनसे मिलने बेंगलुरु गया था। उनके कमरे में ही ठहरा हुआ था, तो वहां मैंने देखा, उन्होंने पंद्रह या बीस जोड़ी जूते सजाकर रखे हैं, एकदम साफ-सुथरे। लोकप्रियता के चरम दौर में भी उनका भोजन एकदम समय से होता था और वह तैलीय या मसालेदार खाने से बचते थे। ऐसा मैंने बहुत कम खिलाड़ियों को करते देखा है। 
उनके खेल की खासियत अगर देखें, तो कम जगह में, छोटे एंगल में भी वह गोल दागने में सक्षम हैं। ऐसे खेल का दुनिया में कम ही खिलाड़ियों को अभ्यास है। यही वजह है, उनकी गिनती सर्वाधिक गोल करने के मामले में दुनिया के श्रेष्ठ समकालीन दो खिलाड़ियों क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी के साथ होती है। वह भारत के सबसे कामयाब फुटबॉलर हैं। ऐसा खिलाड़ी खोजना आसान नहीं होगा। यह मानने में कोई हर्ज नहीं कि अभी उनके स्तर का खिलाड़ी भारत के पास नहीं है। 
याद है, एक बार मैंने उन्हें खूब डांटा था। दिल्ली में टीम संतोष ट्रॉफी खेल रही थी। दो खिलाड़ियों के साथ सुनील ने भी घर जाने का समय मांगा। मैंने कहा, ‘ठीक है, रात साढ़े नौ बजे आ जाना।’ वह साढ़े दस बजे लौटे, तो मैंने उन्हें खूब सुनाया। दूसरे दिन पता चला कि वह अपनी टीम की जर्सी घर छोड़ आए हैं। खैर, उनके लिए मैंने एक जर्सी की व्यवस्था की और उन्होंने गलती के लिए माफी मांगी। विनम्रता उनके स्वभाव में है और तभी वह अपने खेल को ऊंचे मुकाम पर पहुंचा सके हैं।
उनमें अहंकार नहीं है, तो युवाओं के साथ भी उनका अच्छा जुड़ाव है। एक बार वह मेरे फुटबॉल कोचिंग सेंटर, नोएडा में आए, तो बच्चों और उनके माता-पिता से बेहद उत्साह के साथ मिले। ऐसे खिलाड़ी देश की पूंजी हैं, धरोहर हैं। प्रेरणास्रोत और प्रशिक्षक के रूप में उनसे यह देश निश्चित ही बड़ी उम्मीदें रखेगा। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
 

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