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पश्चिम में महाराष्ट्र ने उलझा दिया, पर गुजरात में फिर भगवा लहराया

साल 2024 के चुनावी मौसम में भाजपा ने जिन दो राज्यों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया था। यह सोचकर कि ये सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि वे लोकसभा में सबसे ज्यादा संख्या में सांसद भेजते हैं, पर...

पश्चिम में महाराष्ट्र ने उलझा दिया, पर गुजरात में फिर भगवा लहराया
rohit chandarwarkar
Pankaj Tomarरोहित चंदावरकर, वरिष्ठ पत्रकारTue, 04 Jun 2024 09:14 PM
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साल 2024 के चुनावी मौसम में भाजपा ने जिन दो राज्यों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया था। यह सोचकर कि ये सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि वे लोकसभा में सबसे ज्यादा संख्या में सांसद भेजते हैं, पर उत्तर प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र ने भी भाजपा को बड़ा झटका दिया है। एनडीए गठबंधन को यहां बहुत नुकसान हुआ है। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिव सेना से अलग हुए समूहों को साथ लेकर भाजपा 48 में से लगभग 40 सीटें जीतने के दावे कर रही थी। उत्तर प्रदेश की तरह ही महाराष्ट्र में जनादेश एक हद तक इंडिया ब्लॉक के पक्ष में रहा है। महाराष्ट्र में काफी वर्षों बाद कांग्रेस पार्टी दोहरे अंक में पहुंच गई, जिसकी उम्मीद नहीं थी।  
यहां जो बात साफ तौर पर सामने आई है, वह यह है कि यह राज्य में राजनीतिक दलों के बीच हुई फूट के बारे में जनता की प्रतिक्रिया अब सामने आ गई है। 2024 का लोकसभा चुनाव पहला अवसर था, जब जनता को विभाजन पर प्रतिक्रिया देने का मौका मिला। खुले तौर पर भाजपा ने यही कहा था कि उसका इस विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है, पर विपक्षी नेताओं ने खुलकर बात रखी और लोगों के बीच संदेश चला गया। महाराष्ट्र की दो सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों से कुछ नेताओं को तोड़कर और फिर राज्य सरकार को गिराने की योजना राज्य की जनता को रास नहीं आई है। राज्य के कई हिस्सों में उद्धव ठाकरे और शरद पवार के लिए मूक सहानुभूति लहर थी, जिन्होंने अपना चुनाव चिह्न तक खो दिया था। मुंबई, पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में लहर देखी गई और इसने स्पष्ट रूप से राज्य में इंडिया ब्लॉक को बढ़ावा दिया।
प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध से उत्तर महाराष्ट्र, पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा जैसे कई हिस्सों में किसानों को नुकसान हुआ। वे आंदोलन करते रहे, पर केंद्र द्वारा इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके परिणामस्वरूप थोक बाजार में प्याज की बहुतायत हो गई और कीमतें गिर गईं। 
चौथा कारक, जिसने राज्य के कई क्षेत्रों में चुपचाप लेकिन दृढ़ता से काम किया, वह था मराठा आरक्षण पर नाराजगी। महाराष्ट्र के लोकसभा नतीजों का असर दूरगामी होने वाला है। चूंकि राज्य में इस साल अक्तूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए भाजपा में उच्चतम स्तर पर इस बात को लेकर काफी सोच-विचार हो रहा है कि समस्याओं से कैसे निपटा जाए। निकट भविष्य में महाराष्ट्र कुछ चेहरे बदल सकते हैं, कुछ रणनीतियां बदल सकती हैं, कोई नहीं जानता कि पाइपलाइन में क्या है, लेकिन यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र ने भाजपा को एक बड़ा झटका दिया है और पार्टी की रणनीतियां स्पष्ट रूप से महाराष्ट्र में पूरी तरह से गलत साबित हुई हैं। यह भाजपा के सहयोगियों के लिए भी विचार का समय होगा।
जहां तक पश्चिमी राज्य गुजरात का प्रश्न है,नतीजे लगभग भाजपा की उम्मीद के अनुरूप ही आए हैं। केवल एक सीट बनासकांठा पर भाजपा को अपने भविष्य के बारे में सोचने होगा। गुजरात ने फिर एक बार नरेंद्र मोदी को ताकत दी है।
एक अन्य राज्य, गोवा में भाजपा की सरकार है, पर यहां बहुत कांटे की टक्कर हुई है, एक सीट भाजपा की झोली में गई है, तो एक सीट कांग्रेस जीतने में कामयाब हुई  है। यहां भाजपा और कांग्रेस ने अपना-अपना गढ़ बनाए रखा है। सेंध लगाने की कोशिश नाकाम हुई है। दादरा नगर हवेली में भाजपा को बड़ी जीत मिली है, जबकि दमन दीव में तगड़ा संघर्ष देखने को मिला है। 
कुल मिलाकर, भाजपा के लिए पश्चिमी भारत का एक बड़ा हिस्सा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। भाजपा ने पश्चिमी भारत में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा था, पर उसे उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली है। भाजपा को अब अपनी रणनीति की गंभीरता से समीक्षा करनी पड़ेगी।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)