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स्वच्छ यात्रा और विकास का इंजन बनेगी भारतीय रेल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहीं प्रत्यक्ष, तो कहीं परोक्ष रूप से रेलवे के कायांतरण की रूपरेखा पेश की। कुछ घोषणाएं तो बिल्कुल साफ हैं। मसलन, 40,000 बोगियों को वंदे भारत मानकों...

स्वच्छ यात्रा और विकास का इंजन बनेगी भारतीय रेल
Pankaj Tomarविजय दत्त, सेवानिवृत्त अतिरिक्त सदस्य, देलवे बोर्डThu, 01 Feb 2024 11:37 PM
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहीं प्रत्यक्ष, तो कहीं परोक्ष रूप से रेलवे के कायांतरण की रूपरेखा पेश की। कुछ घोषणाएं तो बिल्कुल साफ हैं। मसलन, 40,000 बोगियों को वंदे भारत मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने की बात कही गई है। इससे निस्संदेह यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा, ट्रेनों की गति बढ़ेगी और सुरक्षा मानक कहीं बेहतर होंगे। इन सबसे ढुलाई व परिवहन खर्च में भी कमी आएगी, जिसके लिए अंतरिम बजट में पीएम गतिशक्ति योजना के तहत तीन नए रेलवे कॉरिडोर बनाने का एलान भी किया गया है। ये कॉरिडोर होंगे- ऊर्जा, सीमेंट व खनिज कॉरिडोर, पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर और उच्च यातायात घनत्व कॉरिडोर। 
अभी हमारे यहां ढुलाई और परिवहन पर 14 फीसदी का खर्च आता है, जबकि अमेरिका में सात फीसदी। रेलवे जितना अधिक माल ढोएगा, यह लागत उतनी कम हो जाएगी, इसलिए बजट में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे सुगम रेल यात्रा के साथ-साथ अधिकाधिक माल परिवहन भी संभव हो सकेगा।
इस बजट में दिसंबर, 2022 की राष्ट्रीय रेल योजना की झलक भी मिलती है। उस योजना में देश के कुल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी 45 फीसदी तक करने की रूपरेखा भी बनाई गई थी। अभी जहां 27 फीसदी माल की ढुलाई रेलवे करता है, वहीं सिर्फ 10 फीसदी यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाता है। इसे बढ़ाने के लिए रेलवे को पूर्णत: विद्युतिकृत करने, उच्च घनत्व वाले मार्गों को चार या छह लेन बनाने, वंदे भारत जैसी पुश पुल ट्रेन लाने आदि प्रयासों की जरूरत बताई गई थी। इसके लिए व्यापक निवेश की दरकार थी। सुखद है कि बजट में इस पर जोर दिया ही गया है, दो दिन पहले वित्त मंत्रालय से आई रिपोर्ट में भी साल 2030 तक भारतीय रेलवे में 11 लाख करोड़ रुपये निवेश की बात कही गई है।
वित्त मंत्री ने मेट्रो और उप-नगरीय रेल सेवा के विकास की भी बात कही। अभी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में उप-नगरीय रेल सेवा चल रही है। बेंगलुरु में भी दो-तीन साल पहले इसका निर्माण शुरू किया गया था। अंतरिम बजट में इसके लिए भी प्रावधान हैं। उप-नगरीय रेल सेवाओं पर ध्यान देना काफी जरूरी भी है, क्योंकि आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में हर दिन 60 लाख यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं, जबकि दिल्ली मेट्रो में यह आंकड़ा रोजाना 35-40 लाख यात्रियों का है। इन रेल सेवाओं के विस्तार के लिए नई लाइनें बिछाने, दोहरीकरण जैसे प्रावधान अंतरिम बजट में किए गए हैं। रेपिड रेल के विस्तार की भी बात की गई है।
अच्छी बात है कि भारतीय रेल पर्यावरण-सुधार में भी अपना योगदान दे रही है। कॉप-26 की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को साल 2070 तक और रेलवे को 2030 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जक बनाने की बात कही थी। नेट जीरो का अर्थ है कि कार्बन उत्सर्जन का पूरी तरह से अंत। इसके लिए जरूरी था कि भारतीय रेलवे को पूरी तरह से विद्युतिकृत करना। हम इस साल ऐसा करने जा रहे हैं, और इस तरह भारतीय रेल विश्व की एकमात्र ऐसी रेल सेवा बन जाएगी, जो पूरी तरह से विद्युतिकृत होगी। 
जाहिर है, इसमें जितना हिस्सा अक्षय ऊर्जा का होगा, हम उतनी तेजी से नेट जीरो की तरफ बढ़ेंगे। अभी रेल में 13-14 फीसदी अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। अंतरिम बजट में इसे बढ़ाने का एलान वित्त मंत्री ने किया है। इसमें ऑफशोर विंड, यानी तटीय इलाकों में पवन ऊर्जा बनाने की योजना में सरकार द्वारा वित्तीय मदद की घोषणा फायदेमंद साबित हो सकेगी।
साफ है, सरकार एक तरफ रेल सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास, नई ट्रेनों की शुरुआत, रेलवे स्टेशनों के पुनरोद्धार जैसे कामों पर ध्यान दे रही है, तो दूसरी तरफ इसे विकास का इंजन भी बना रही है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे से भी इसके संकेत मिलते हैं, क्योंकि इसे हरित बनाने में रेलवे की बड़ी भूमिका होगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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