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कृत्रिम बुद्धिमता पर निर्भरता से कितनी बदलेगी पत्रकारिता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नित नए रूप में सामने आ रही है। अब इसकी ‘टेक्स्ट टु स्पीच’ फीचर की बदौलत भारतीय न्यूजरूम में भी मशीन को इंसानी चेहरे में ढालकर खबरें पेश की जाने लगी हैं। आज मीडिया...

कृत्रिम बुद्धिमता पर निर्भरता से कितनी बदलेगी पत्रकारिता
Monika Minalसंजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, आईआईएमसी, दिल्लीFri, 14 Jun 2024 11:00 PM
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नित नए रूप में सामने आ रही है। अब इसकी ‘टेक्स्ट टु स्पीच’ फीचर की बदौलत भारतीय न्यूजरूम में भी मशीन को इंसानी चेहरे में ढालकर खबरें पेश की जाने लगी हैं। आज मीडिया कंपनियां अपने कंटेंट को अधिक बेहतर बनाने से लेकर बुलेटिन प्रसारित करने तक में एआई का सहारा लेने लगी हैं। इससे एक तरफ तो काम आसान और तेजी से पूरे होने लगे हैं, तो दूसरी तरफ कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं, जिनमें साख का संकट सबसे पहले है। 
इंसान की जगह मशीन के इस्तेमाल का पहला खतरा इंसानों पर ही पड़ता है। ‘न्यूजजीपीटी’ दुनिया का पहला समाचार चैनल है, जिसका पूरा कंटेंट एआई द्वारा तैयार किया जा रहा है। चैनल के प्रमुख एलन लैवी ने इसे खबरों की दुनिया का गेमचेंजर कहा था, क्योंकि न इसमें कोई रिपोर्टर है और न ही यह किसी से प्रभावित है। यही बात मीडिया जगत में काम करने वालों के लिए बड़ा खतरा है। जैसे-जैसे मीडिया के क्षेत्र में एआई का प्रभुत्व बढ़ रहा है, वहां मौजूदा लोगों की नौकरियों पर तकनीक का कब्जा होने की आशंका बढ़ रही है। लेखन, संपादन, एंकरिंग, प्रस्तुति तक के सारे कामों में एआई का सहारा लिया जा रहा है। 
बीबीसी  द्वारा प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, साल 2020 में माइक्रोसॉफ्ट ने बड़ी संख्या में एमएसएन वेबसाइट के लिए लेखों के चयन, क्यूरेटिंग, हेडलाइन तय करने और एडिटिंग करने वाले पत्रकारों की जगह स्वचालित सिस्टम को अपनाने की योजना बनाई। इस योजना के सफल होने के बाद लगभग 50 न्यूज प्रोड्यूसर्स को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। ठीक इसी तरह, साल 2022 के अंत में अमेरिकी टेक्नोलॉजी न्यूज वेबसाइट सीएनईटी  एआई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दर्जनों फीचर लेख तैयार किए और प्रकाशित किए।  एसोसिएटेड प्रेस ने भी अपनी कहानियों के लिए एआई का इस्तेमाल किया। ये सारी बातें यही बताती हैं कि कैसे मीडिया पेशेवरों की नौकरियां एआई लील रही है। 
भारत समेत कई देशों में न्यूज एंकर के तौर पर कंप्यूटर जनित मॉडल, यानी एआई एंकर समाचार पढ़ते नजर आने लगे हैं। बहुत हद तक इंसानी तौर पर दिखने वाले ये एंकर 24 घंटे और सातों दिन डेटा के आधार पर काम कर सकते हैं। भारत की पहली एआई न्यूज एंकर सना के लॉन्च के समय इसी तरह के शब्द कहे गए थे कि वह बिना थके लंबे समय तक काम कर सकती है। द गार्जियन के अनुसार, साल 2018 में चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ पहला एआई न्यूज एंकर दुनिया के सामने लेकर आई। इस एजेंसी के किउ हाओ पहले एआई एंकर हैं, जिसने डिजिटल वर्जन पर समाचार प्रस्तुत किया। पिछले वर्ष चीन ने एआई महिला न्यूज एंकर को भी लॉन्च किया। खबरों में कहा गया था कि इस एआई न्यूज एंकर ने हजारों न्यूज एंकर्स से स्किल सीखे हैं और वह 365 दिन 24 घंटे लगातार खबरें बता सकती है। चीन के अलावा कुवैत भी एआई न्यूज एंकर लॉन्च कर चुका है। रूस का स्वोए टीवी भी ऐसा कर चुका है।
यह स्थिति तब है, जब एआई अपने शुरुआती चरण में है, लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पत्रकारिता को किस तरह से बदलेगी, क्योंकि आज क्लिकबेट (सनसनी पैदा करने वाली हेडलाइन लगाने) और प्राइम टाइम में चिल्लाने वाली पत्रकारिता का दौर है। ऐसे में, क्या रोबोट इंसानी रवैये के इतर विवेक के साथ पत्रकारिता करेंगे? दुनिया के प्रसिद्ध मीडिया स्तंभकार पामेल फिलिपोज ने कहा है कि एआई बहुस्तरीय समस्या पैदा कर सकती है और अधिक दुष्प्रचार फैला सकती है। कई पत्रकार और मीडिया पेशवर भी यही मानते हैं कि एल्गोरिद्म और ऑटोमेशन पर बढ़ती निर्भरता से पत्रकारिता की विश्वसनीयता कम हो सकती है।
स्पष्ट है, एआई न्यूज एंकर या पत्रकारिता में एआई की निर्भरता सूचना क्षेत्र के भविष्य के लिए दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ, इससे मीडिया के नएपन और संचार के क्षेत्र की अपार संभावनों पर ध्यान दिया जा रहा है, वहीं इसे नैतिक और जिम्मेदारी तय करने के लिए नियमन और निरीक्षण की आवश्यकता भी है। फिलहाल, इसका बढ़ता प्रभाव सूचनाओं से मानवीय पक्ष को खत्म करने वाला ही ज्यादा नजर आ रहा है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)