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आंध्र प्रदेश और चंद्रबाबू नायडू से फिर सबको बड़ी उम्मीदें

एन चंद्रबाबू नायडू जब बुधवार को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तब राजधानी के अशोक रोड स्थित आंध्र भवन के कुछ पुराने मुलाजिम उस दिन को याद कर रहे थे, जब वह पहली बार...

आंध्र प्रदेश और चंद्रबाबू नायडू से फिर सबको बड़ी उम्मीदें
Pankaj Tomarविवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकारSun, 16 Jun 2024 10:45 PM
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एन चंद्रबाबू नायडू जब बुधवार को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तब राजधानी के अशोक रोड स्थित आंध्र भवन के कुछ पुराने मुलाजिम उस दिन को याद कर रहे थे, जब वह पहली बार अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। यह बात 1995 की है। अपने ससुर एनटी रामाराव को मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ करके नायडू ने सत्ता की बागडोर संभाली थी। तब उनकी छवि बहुत उजली नहीं थी। हालांकि, वक्त गुजरने के साथ नायडू ने साबित किया कि वह एक उद्योग और प्रौद्योगिकी-समर्थक मुख्यमंत्री हैं। 
बेशक, उनकी कोशिशों से जायकेदार बिरयानी और चारमीनार के लिए मशहूर हैदराबाद भारत के आईटी हब के रूप में स्थापित हुआ। पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वह माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स से मिले। उस मुलाकात के बाद हैदराबाद की किस्मत खुल गई थी। दुनिया भर की चोटी की आईटी कंपनियों ने वहां अरबों रुपयों का निवेश किया। एक इंटरव्यू में नायडू ने बिल गेट्स से हुई मुलाकात की जानकारी दी थी। बिल गेट्स किसी काम के लिए राजधानी में थे। संयोग से नायडू भी तब राजधानी में थे। आंध्र के मुख्यमंत्री की तरफ से अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों से गुजारिश की गई कि उनकी बिल गेट्स से मुलाकात कराई जाए। मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिल गेट्स बहुत व्यस्त हैं और अगर वह उनसे मिलने को इच्छुक हैं, तो शाम को अमेरिकी दूतावास के रूजवेल्ट हाउस में आयोजित पार्टी में शामिल हो जाएं। नायडू को दूतावास का न्योता मिला और वह तय समय पर पहुंच गए। उसी पहली मुलाकात में नायडू ने लैपटॉप पर गेट्स को पे्रजेंटेशन दिया। ऐसा प्रेजेंटेशन देने वाले नायडू देश में पहले मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने बिल गेट्स को समझाया कि माइक्रोसॉफ्ट के लिए हैदराबाद में निवेश करना लाभ का सौदा रहेगा। उनकी बातों से बिल गेट्स काफी प्रभावित हुए और साल 1998 में हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट का रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट सेंटर (माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर) स्थापित हुआ। उसके बाद तो हैदराबाद और आंध्र प्रदेश में दर्जनों आईटी कंपनियों ने तगड़ा निवेश किया।
चंद्रबाबू नायडू के मन में बिल गेट्स के प्रति बहुत कृतज्ञता का भाव है। क्या इसे संयोग माना जाए कि पिछले बुधवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ विजयवाड़ा के आईटी पार्क में आयोजित समारोह में ली? बतौर मुख्यमंत्री नायडू जब भी दिल्ली या मुंबई जाते हैं, तो वह देश के बड़े उद्योगपतियों से अवश्य मिलते हैं और उनसे गुजारिश करते हैं कि वे उनके प्रदेश में निवेश करें। अब चूंकि हैदराबाद तेलंगाना में जा चुका है, तो यकीनन वह हरचंद कोशिश करेंगे कि अपनी नई राजधानी में एक नया आईटी हब बनाएं। 
मौजूदा दौर की यह बड़ी सच्चाई है कि कोई भी राज्य निजी क्षेत्र के बडे़ निवेश के बिना तेजी से चौतरफा विकास नहीं कर सकता। आपको अपने राज्य में निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने ही होंगे, ताकि निजी निवेशकों का भरोसा जीता जा सके और वे बिना किसी संकोच के आ सकें। यह अपने आप में सुखद है कि अब अधिकतर राज्य अपने यहां निवेश लाने की पहल कर रहे हैं और इनमें इसे लेकर एक स्वस्थ प्रतिस्पद्र्धा भी है। जाहिर है, जो राज्य बेहतर कानून-व्यवस्था और औद्योगिक माहौल की दिशा में ठोस कदम उठाएगा, उसे उतना ही अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और घरेलू निवेशकों का समर्थन हासिल होगा। 
चंद्रबाबू नायडू अपनी बात मनवाने में कुशल हैं। उन्हें आप तर्कों से नहीं हरा सकते। हां, विनम्रता से जरूर अपने पक्ष में कर सकते हैं। विराट बहुमत के साथ चौथी बार का शपथ ग्रहण उनके राजनीतिक कद का परिचायक है। एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने में उनकी भूमिका सबके सामने है। अब जब केंद्र की नई सरकार में उनकी भूमिका ‘किंग मेकर’ की है, तो यकीनन वह आंध्र के लिए अधिकतम लाभ उठाना चाहेंगे। मगर उनके आगे चुनौती भी कम नहीं है। उन्होंने राज्य की जनता से जो वायदे किए हैं, उसके लिए काफी संसाधन चाहिए। नायडू के चौथे कार्यकाल पर आंध्र ही नहीं, समूचे देश की नजर रहेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)