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सागर के खारे पानी को हम बड़े पैमाने पर बनाएंगे मीठा

भारत सहित दुनिया के कई इलाकों में पेयजल का भयानक संकट पैदा हो गया है। दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केपटाउन को दुनिया का पहला जलविहीन शहर घोषित किया गया है। वहां की सरकार ने 14 अपै्रल को 2023 के बाद ...

सागर के खारे पानी को हम बड़े पैमाने पर बनाएंगे मीठा
Monika Minalनिरंकार सिंह, पूर्व सहायक संपादक, हिंदी विश्वकोषThu, 11 Apr 2024 09:39 PM
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भारत सहित दुनिया के कई इलाकों में पेयजल का भयानक संकट पैदा हो गया है। दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केपटाउन को दुनिया का पहला जलविहीन शहर घोषित किया गया है। वहां की सरकार ने 14 अपै्रल को 2023 के बाद पानी की आपूर्ति करने में असमर्थता दिखाई है। वहां नहाने पर रोक लगा दी गई है। दस लाख लोगों के कनेक्शन काटने की तैयारी चल रही है। हाल ही में शिमला और तमिलनाडु के दक्षिण पूर्व में स्थित रामनाथपुरम जिला खारे पानी और भूजल स्रोतों की किल्लत के कारण चर्चा में रहा है, पर बीते साल से ही यहां 20 हजार लीटर पेयजल प्रतिदिन संशोधित किया जा रहा है। इसके लिए ‘सोलर थर्मल ऑस्मोसिस वॉटर डिस्टलाइजेशन सिस्टम एफओ’ की स्थापना की गई है। इस तकनीक को आईआईटी, मद्रास और इंपीरियल के जीडीएमजी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
जल तकनीक  से संचालित इस तकनीक को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग डीएसटी ने भी सहायता प्रदान की है। भारत के वैज्ञानिकों ने समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने की स्वदेशी तकनीक विकसित कर ली है। इस संयंत्र को लक्षद्वीप में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। संयंत्र की क्षमता हर दिन एक लाख लीटर पीने योग्य पानी बनाने की है। देश के तटीय इलाकों में पानी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन पीने योग्य नहीं है। हम समुद्र के खारे पानी को बड़े पैमाने पर पीने योग्य कैसे बनाएं? इजरायल उन देशों में एक है, जिन्होंने समुद्री जल को पेयजल बनाने में महारत हासिल की है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान की मदद से आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने समुद्र के पानी को पीने योग्य पानी में बदलने के साधन खोजने के लिए निरंतर शोध किए गए हैं, जो पीने, खाना पकाने व अन्य व्यक्तिगत उपयोग के लिए उपयुक्त हो सकता है। समुद्र के खारे पानी को एलटीटीडी तकनीक के जरिये पीने लायक बनाया जाता है। इस तकनीक में प्राकृतिक तरीके से समुद्र के पानी को गरम कर खारेपन को अलग किया जाता है। यह ऐसी प्रक्रिया है, जो खारे पानी से खनिज घटकों को हटा देती है। एलटीटीडी तकनीक को लक्षद्वीप के लिए उपयुक्त पाया गया है। इजरायल ने यह तकनीक भारत को दी थी। साल 2018 में जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत आए थे, तब उन्होंने गुजरात में मोबाइल वाटर डिसैलिनेशन जीप उपहार के तौर पर भारत को दिया था। यह जीप खारे पानी को मीठा बनाती है। इस तकनीक पर इजरायल की कंपनी गेल वाटर टेक्नोलॉजी का पेटेंट है। इस तकनीक को गेलमोबाइल कहा जाता है। एक दिन में यह मोबाइल प्लांट (जीप) 20 हजार लीटर समुद्र के खारे पानी को साफ कर सकता है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इसमें 80 हजार लीटर से ज्यादा काले, मटमैले और गंदे पानी को पीने लायक बनाने की क्षमता है।
क्या हम इसी तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर कर सकते हैं? समुद्री या खारे पानी को लवण व खनिज से मुक्त करने की प्रक्रिया डिसेलिनेशन कहलाती है। इस प्रक्रिया में काफी खर्च आता है। चेन्नई में पानी की मांग करीब  1,100 एमएलडी है, पर प्राकृतिक स्रोतों से केवल 850 एमएलडी पानी ही मिल पाता है। चेन्नई के समुद्र तट पर दो विलवणीकरण अर्थात डिसेलिनेशन संयंत्र काम कर रहे हैं और दोनों की क्षमता 100 एमएलडी है। ऐसे दो और संयंत्रों पर काम चल रहा है, जो अगले तीन वर्षों में 550 एमएलडी समुद्र्री पानी का डिसेलिनेशन करने में सक्षम होंगे। अभी 100 लीटर समुद्री जल से 40 लीटर पेजयल बनाया जा सकता है। 
एक बड़ी समस्या है कि खारे पानी को मीठे पानी में बदलने के लिए एक तो काफी मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत देश में कुछ एलटीटीडी की स्थापना की गई है, जो कवारल्ली, मिलीकॉय, अगत्ती, लक्षद्वीप में स्थापित है। इनकी प्रौद्योगिकी पूरी तरह से घरेलू व पर्यावरण अनुकूल है। प्रत्येक एलटीटीडी संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन एक लाख लीटर समुद्र्री जल शुद्ध करने की है। ध्यान दीजिए, इस तकनीक से एक लीटर मीठा पानी बनाने में 19 पैसे का खर्च आता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)