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हमें बेहतर फैसले का ढंग सिखाती खेल दुनिया 

बीजू डोमिनिक, सीईओ, फाइनल माइल कन्सल्टिंगPublished By: Manish Mishra
Thu, 29 Jul 2021 11:27 PM
हमें बेहतर फैसले का ढंग सिखाती खेल दुनिया 

इंसान के फैसले लेने की प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक खेल क्षेत्र है। खेल क्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने से पहले हर खिलाड़ी को कई गतिशील कारकों को ध्यान में रखना पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में निर्णय बहुत जटिल होते हैं। प्रतिस्पद्र्धी खेलों में मैदान पर फैसले अत्यधिक वास्तविक और भावनात्मक तनाव के क्षणों में लिए जाते हैं, इनका असर व्यापक होता है। वर्षों की तैयारी कुछ ही क्षणों में नष्ट हो सकती है।
जॉन मैक्क्रोन की पुस्तक- गोइंग इनसाइड : ए टूर राउंड ए सिंगल मोमेंट ऑफ कॉन्शियसनेस - में एक खिलाड़ी के मस्तिष्क में निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में वर्णन है। पुस्तक में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में एप्लाइड साइकोलॉजी के एक शोधकर्ता डॉक्टर पीटर मैकलियोड के अध्ययन का ब्योरा है। मैकलियोड ने अध्ययन किया कि खेल के वक्त एक बल्लेबाज के मस्तिष्क में क्या चल रहा होता है। जब कोई तेज गेंदबाज 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकता है, तो वह गेंद 440 मिली सेकंड में बल्लेबाज तक पहुंच जाती है। गेंदबाज के हाथ से बॉल छूटने और गेंद के बल्लेबाज की दृष्टि पटल तक पहुंचने में मस्तिष्क किसी भी तरह के अनुमान के लिए कम से कम 200  मिली सेकंड का समय लेता है। इसके बाद सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी अपने बल्ले को घुमाने और गेंद पर प्रहार करने में कम से कम 150 से 200 मिली सेकंड का समय लेंगे। इसका मतलब यह कि कौन सा शॉट सटीक और अनुकूल है, यह अहम फैसला लेने के लिए बल्लेबाज के पास एक सेकंड के हजारवें हिस्से के बराबर समय ही उपलब्ध होता है। 
क्रिकेट का यह गहन विश्लेषण हमें इंसान के निर्णय लेने की प्रक्रिया के एक अन्य महत्वपूर्ण लक्षण की याद दिलाता है। जैसे ही गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटेगी, गेंद की छवि बनाने में मस्तिष्क को 200 मिली सेकंड का समय लगता है, तब तक गेंद पिच का आधा रास्ता तय कर चुकी होती है। तो क्या बल्लेबाज का मस्तिष्क वाकई में गेंद की छवि बनाने के साथ ही खेल के अन्य पहलुओं और संभावित तरीकों पर काम कर रहा होता है? मस्तिष्क तमाम संभावनाओं को टटोलता है और फिर बल्लेबाज अनुमान लगाकर अपने लिए सबसे अच्छा शॉट चुनता है। मैक्क्रोन ने इसे मस्तिष्क के पूर्वानुमानों के ऊर्जावान लंबे और पतले तंतु तंत्र के रूप में वर्णित किया है। मानव मस्तिष्क ज्यादातर फैसले उम्मीदों के आधार पर लेता है। मानव मस्तिष्क को किसी ऑडियो से प्रेरणा महसूस करने और उसका जवाब देने के लिए कम से कम 120 मिली सेकंड की जरूरत होती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुट ब्लॉक्स में लगे प्रेशर सेंसर किसी भी गतिविधि को 120 मिली सेकेंड में रिकॉर्ड करते हैं, ताकि हैरत में डालने वाले किसी झूठ या सच को पकड़ा जा सके। जब बास्केटबॉल टीम का कोच, जो दो अंकों से पीछे चल रहा है और खेल खत्म होने में केवल दो सेकंड हैं, तब उसे अच्छी तरह से मालूम है कि उन दो सेकंड में बहुत कुछ हो सकता है। वह खेल में बचे हुए हर मिली सेकंड की इबारत लिखता है। जैसे उन दो सेकंड में पांच खिलाड़ियों में से हरेक को क्या चाल चलनी चाहिए? विरोधी टीम की रक्षा रणनीति का मुकाबला करने के लिए क्या किया जाना चाहिए? खेल क्षेत्र में क्रियाशीलता के हर सूक्ष्म क्षण की उपयोगिता है। ऐसी जानकारियों का उपयोग जीतने की रणनीतियां बनाने में किया जा सकता है। बिग डाटा एनालिटिक्स और न्यूरो साइंस ने इसमें बहुत योगदान दिया है। व्यापार व नीति निर्माण की दुनिया भी अंतिम कुछ क्षणों की गहन समझ से बहुत कुछ हासिल कर सकती है। उदाहरण के लिए, जब कोई महिला सुपर मार्केट में होती है, तब उसके दिमाग में क्या चल रहा होता है? जब वह अपने घर में आराम से बैठे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ खरीद रही होती है, तब उसके दिमाग में क्या होता है? अगर यह पता लग जाए, तो उत्पादकों को बेहतर उत्पादन करने में मदद मिल सकती है। मस्तिष्क की क्षमता, शक्ति का उपयोग सड़क संकेतकों के प्रभावी डिजाइन में किया जा सकता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। शायद, मानव व्यवहार ब्रह्मांड की सबसे जटिल परिघटना है। इस जटिलता को सुलझाने के लिए ज्ञान के कई क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है। आइए, इस सूची में खेल क्षेत्र को शामिल करें।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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