फोटो गैलरी

Hindi News ओपिनियन नजरियाचीन के वायरस से फिलहाल हमें कितना डरना चाहिए

चीन के वायरस से फिलहाल हमें कितना डरना चाहिए

चार साल पहले यही मौसम था, सर्दी की शुरुआत ही हुई थी, जब चीन से कोरोना वायरस की लहर उठी और देखते-देखते पूरी दुनिया उसकी घातक चपेट में आ गई थी। इस साल फिर वहां एक वायरस के प्रसार की सूचनाएं मिल...

चीन के वायरस से फिलहाल हमें कितना डरना चाहिए
Pankaj Tomarराजीव दासगुप्ता, प्रोफेसर, कम्यूनिटी हेल्थ, जेएनयूMon, 27 Nov 2023 10:57 PM
ऐप पर पढ़ें

चार साल पहले यही मौसम था, सर्दी की शुरुआत ही हुई थी, जब चीन से कोरोना वायरस की लहर उठी और देखते-देखते पूरी दुनिया उसकी घातक चपेट में आ गई थी। इस साल फिर वहां एक वायरस के प्रसार की सूचनाएं मिल रही हैं और यह वायरस भी इंसान, विशेषकर बच्चों के श्वसन-तंत्र पर हमला कर रहा है। लिहाजा, चीन में फैल रही माइकोप्लाज्मा निमोनिया और इन्फ्लूएंजा (फ्लू) को लेकर दुनिया भर में स्वाभाविक चिंता देखी जा रही है। हालांकि, यह कोई नया वायरस नहीं है और इसे फिलहाल वहां भी नियंत्रण में बताया जा रहा है, लेकिन इसके मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए, भारत सरकार ने भी अपने यहां सुरक्षा को लेकर तमाम तरह के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकारों और अस्पतालों को निमोनिया के मरीजों की खास निगरानी करने और जरूरी एहतियाती उपाय अपनाने को कहा गया है।
सवाल यह है कि इस इन्फ्लूएंजा और कोरोना वायरस में कितनी समानता है? निश्चित तौर पर, ये दोनों ही वायरस काफी तेजी से फैलते हैं और दोनों के पास महामारी पैदा करने की पर्याप्त क्षमता है। फिर भी, दोनों एक-दूसरे से अलग प्रकृति के वायरस हैं। दरअसल, चीन में जिस एच9एन2 वायरस की वजह से इन्फ्लूएंजा फैला है, उसकी कई लहर आ चुकी है, और यह ऐसे ही आती रहेगी, क्योंकि इसका रूप बड़ी तेजी से बदलता है। किसी भी वायरस के रूप में बदलाव वास्तव में दो तरह से होता है, जिसे तकनीकी शब्दावली में ‘ड्रिफ्ट’ और ‘शिफ्ट’ कहते हैं। ड्रिफ्ट का मतलब होता है वायरस के जीन में मामूली बदलाव, जिसमें सतह के प्रोटीन में भी कुछ हद तक बदलाव होते हैं, जबकि शिफ्ट में अचानक इतना बड़ा बदलाव होता है कि उससे वायरस में नया प्रोटीन बन जाता है। चूंकि इसमें प्रोटीन नया होता है, इसलिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उसको पकड़ने में सफल नहीं हो पाती। एच9एन2 वक्त के साथ नए-नए रूप लेता रहता है, जिसके कारण कमोबेश एक नियमित अंतराल पर मानव आबादी इसकी चपेट में आती रहती है। यही वजह है कि एच9एन2 वायरस पर 2019 के बाद से हरसंभव निगाह रखी जा रही है। 

अभी इस बीमारी के फैलने की एक और वजह है। इन्फ्लूएंजा आमतौर पर सर्दी के मौसम में ही फैलता है। अभी चीन में तेज सर्दी पड़ रही है और कोरोना के समय लगाए गए प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं। इसके मरीज उन इलाकों या शहरों में अधिक आ रहे हैं, जो काफी उन्नत है और जहां पर जनसंख्या घनत्व ज्यादा है। चूंकि बच्चे एक-दूसरे के संपर्क में अधिक रहते हैं, इसलिए उनमें इस निमोनिया का प्रसार काफी ज्यादा हो रहा है। फिलहाल राहत की बात यह है कि वहां मौत की खबरें कम हैं। वैसे भी, इन्फ्लूएंजा वायरस या बीमारी बुजुर्गों में अधिक घातक होती है। इसका इलाज आमतौर पर वही है, जो अन्य इन्फ्लूएंजा का है और लक्षण भी समान रूप से सर्दी-जुकाम ही हैं। बीमारी के लक्षण को देखकर ही इसका उपचार किया जाता है। इन्फ्लूएंजा वायरस चूंकि नियमित तौर पर दुनिया भर में फैलता रहा है, इसलिए भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। संभवत: यह नया वायरस भी यहां आ सकता है। बस दिक्कत यह है कि इसका पता जब तक चल पाता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और इसका चारों ओर संक्रमण फैल चुका होता है। चीन में भी अस्पताल हांफने लगे हैं, क्योंकि उन पर अचानक मरीजों का बोझ आ गया है।

भारत सरकार ने स्वाभाविक ही इस संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह एक सराहनीय पहल है। इस दिशा-निर्देश में पूर्व-तैयारी की चर्चा है। अच्छी बात यह है कि कोविड के कारण ये चीजें काफी हद तक काम करने लगी हैं। वैसे, अपने यहां खतरा उन इलाकों में ज्यादा है, जहां पर बाहर से लोग आते हैं। खासकर महानगरों से इस वायरस का प्रसार हो सकता है। हालांकि, सुखद बात यह है कि अब तक ऐसा कोई उभार देखने को नहीं मिला है। बहुत मुमकिन है कि यह दिखे भी नहीं, क्योंकि यह वायरस अलग-अलग देशों में अलग-अलग रूप अख्तियार करता है। फिर भी, हमें सावधान रहना होगा और इस पर नजर बनाए रखनी होगी। किसी किस्म की अफरा-तफरी से बचने का यही मुफीद रास्ता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें