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Hindi News ओपिनियन नजरियामहज दस घंटे से बढ़ते-बढ़ते पच्चीस घंटे की ओर दिन

महज दस घंटे से बढ़ते-बढ़ते पच्चीस घंटे की ओर दिन

हमारी पृथ्वी का एक दिन 24 घंटे का होता है, पर क्या हमेशा दिन की समय-सीमा यही थी और आगे भी यही रहेगी? अब ऐसा नहीं कहा जा सकता है। भूवैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले समय में दिन की अवधि 24 घंटे...

महज दस घंटे से बढ़ते-बढ़ते पच्चीस घंटे की ओर दिन
nirankar singh
Pankaj Tomarनिरंकार सिंह, पूर्व सहायक संपादक, हिंदी विश्वकोशTue, 25 Jun 2024 09:09 PM
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हमारी पृथ्वी का एक दिन 24 घंटे का होता है, पर क्या हमेशा दिन की समय-सीमा यही थी और आगे भी यही रहेगी? अब ऐसा नहीं कहा जा सकता है। भूवैज्ञानिकों का दावा है कि आने वाले समय में दिन की अवधि 24 घंटे से ज्यादा हो सकती है, क्योंकि यह पिछले हजारों साल से बढ़ रही है। जब चंद्रमा का निर्माण हुआ था, तब हमारी पृथ्वी का दिन 10 घंटे का था और आज यह 24 घंटे का है। अनुमान है कि यह समय के साथ बढ़ता रहेगा। दिन का समय हमेशा बदलता रहा है। अब यह धीरे-धीरे लंबा होता जाएगा। ऐसा समय भी भविष्य में आ सकता है कि जब दिन का समय 25 घंटे का हो जाएगा। 
भूवैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक दिन में 25 घंटे हो सकते हैं। ऐसा होने की उम्मीद ज्यादा है। यह दावा टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख ने किया है। दिलचस्प बात है कि हमेशा से ऐसा नहीं था, कभी एक दिन में 24 घंटे से कम हुआ करते थे, अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक दिन में 25 घंटे हो सकते हैं। ऐसा होने की उम्मीद ज्यादा है। इसकी वजह धरती के घूमने से जुड़ी है। पृथ्वी के घूमने से होने वाला उतार-चढ़ाव खगोल विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे कई दिलचस्प जानकारियां मिलती हैं। अब एक दिन में घंटे बढ़ने की बात इसी में हुए बदलाव से सामने आई है। टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख खगोल विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च कर रही है। यह संस्थान पृथ्वी के बारे में डाटा हासिल करने के लिए एक खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल कर रहा है। इसे रिंग लेजर कहते हैं। इसका काम पृथ्वी के घूमने के पैटर्न और गति को मापना है। यह इतने सटीक तरह से काम करता है कि पृथ्वी की गति में होने वाले छोटे-बड़े बदलाव को भी आसानी से पकड़ लेता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ठोस और द्रव जैसी चीजें पृथ्वी के रोटेशन या घूमने के गति पर असर डालती हैं। ये बदलाव वैज्ञानिकों को नई जानकारियां देने के साथ मौसम में जुड़े बदलाव, जैसे अल नीनो असर को समझने में मदद करते हैं।
रिपोर्ट कहती है कि लेजर रिंग एक ऐसा गायरोस्कोप है, जो धरती के 20 फिट नीचे एक खास तरह के  दबाव वाले हिस्से में है। यहां से निकलने वाला लेजर धरती के घूर्णन, यानी घूमने की गति में होने वाले बदलाव को तुरंत पकड़ लेता है। यहीं से घंटों के बढ़ने की संभावना पर वैज्ञानिकों ने अपनी मुहर लगाई है।
खगोल वैज्ञानिक दावा करते हैं कि आज भले ही 24 घंटे का एक दिन है, लेकिन डायनासोर के दौर में एक दिन में 23 घंटे होते थे। एबीसी  की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उस युग में चांद धरती के थोड़ा पास हुआ करता था। इस रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव ऐसा नहीं है कि सब कुछ एक ही दिन में हो जाएगा। यह धीरे-धीरे होगा। 
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि करीब 20 करोड़ साल बाद एक दिन 25 घंटे का हो जाएगा। कभी पृथ्वी पर ऐसा भी दौर था, जब दिन की लंबाई केवल 19 घंटे थी। धरती के बनने के समय पृथ्वी अपनी धुरी पर 10 घंटे से भी कम समय में घूमती थी, यानी एक दिन महज 10 घंटा का था। अब हर 24 घंटे में एक बार पृथ्वी अपनी धुरी पर चक्कर पूरा करती है, जो एक दिन को दिखाता है। पृथ्वी का घूमना वास्तव में इस ग्रह की उत्पत्ति की कहानी का प्रमाण है। कोई ग्रह कितनी तेजी से घूमता है, यह इस बात से निर्धारित होता है कि इसका निर्माण कैसे हुआ। जब प्रोटो प्लेनेटरी डिस्क में सूर्य की परिक्रमा करने वाली धूल, चट्टानें और गैस अंतरिक्ष में एक साथ आते हैं, तब ग्रह-निर्माण होता है।
हमारी पृथ्वी के दिन की लंबाई हमें सुसंगत और एक समान लग सकती है, पर ऐसा नहीं है। बहुत धीरे-धीरे इसमें बदलाव आ रहा है। एक शताब्दी में दिन का समय 1.7 मिली सेकंड बढ़ रहा है। वास्तव में, एक साथ अनेक खगोलीय घटनाएं चल रही हैं। एक तथ्य यह भी है कि चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर होता जा रहा है। कहा जाता है कि परिवर्तन सृष्टि का नियम है और हमें हर हाल में तालमेल बिठाकर चलने के लिए तैयार रहना चाहिए।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)