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बढ़ते साइबर हमलों के बीच टिकने की जद्दोजहद 

जसप्रीत बिंद्रा, तकनीक विशेषज्ञPublished By: Manish Mishra
Sun, 25 Jul 2021 08:53 PM
बढ़ते साइबर हमलों के बीच टिकने की जद्दोजहद 

ब्लूमबर्ग  में हाल में प्रकाशित एक लेख में एक ऐसी कंपनी का जिक्र है, जिसके कर्मचारियों के बच्चों को कंपनी की पार्टियों में शिरकत करने के पहले किसी भी गोपनीय जानकारी का खुलासा न करने वाले अनुबंध पर हस्ताक्षर करने होंगे। इसमें एकमात्र अपवाद वे बच्चे हैं, जिन्होंने अभी तक लिखना-पढ़ना नहीं सीखा है। कंपनी के नए कर्मचारी दो दिन साइबर कक्षाओं में व्यतीत करते हैं, तीन दिन कार्यालय के कंप्यूटर और पासवर्ड की सेटिंग करते हैं और फिर एक सप्ताह तक निजी सुरक्षा मानकों को लेकर अनुशंसित 70 प्रकार की जांच-परीक्षणों से गुजरते हैं, इसमें घर पर अलार्म और सर्विलांस कैमरे लगवाना और सोशल नेटवर्किंग एकाउंट्स बंद करना भी शामिल है। वे खुद की पहचान इस कंपनी के कर्मचारी के रूप में नहीं कर सकते। इस फर्म के कुछ अधिकारियों में से एक ताकेशी चिनो को पूरी दुनिया को यह बताने की अनुमति तो है कि वह कहां काम करते हैं, पर वह अपनी पत्नी को भी नहीं बता सकते कि उनका कार्यालय कहां है? उनकी संस्था न तो सीआईए है, न ही कोसा नोस्त्रा (माफिया आतंकी के लिए प्रयुक्त शब्द) या सिसिलियन माफिया। उनका ऑर्गेनाइजेशन तो सैन फ्रांसिस्को स्थित 10 अरब डॉलर वाला क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म है, और वह फुलप्रूफ साइबर सुरक्षा पर जोर देता है, विशेषकर रैंसमवेयर हमलों के खिलाफ। 

लगता है, लगभग रोज डाटा में सेंध लगाने, हैकिंग या रैंसमवेयर हमलों की घटनाएं होती हैं। इन हमलों की शिकार होने वाली टार्गेट और मार्सक जैसी जानी-मानी कंपनियां हैं, भारत में भी मोबिक्विक आदि कंपनियों से डाटा लीक की घटनाएं हुई हैं। कुछ सरकारें भी इसमें लिप्त रहती हैं। इजरायल व अमेरिका ने वर्ष 2010 में कंप्यूटर वायरस का हमला कर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोक दिया था। पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूसी हैकिंग ग्रुप रेविल के कई हमलों को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को औपचारिक रूप से चेताया है। और इसी सप्ताह, अमेरिका व उसके सहयोगियों ने चीन पर माइक्रोसॉफ्ट के एक्सचेंज सर्वर में सेंध लगाने का विधिवत आरोप लगाया है। वर्षों से साइबर सुरक्षा बड़ी चिंता का मुद्दा रहा है और हाल में साइबर हमले कई गुना बढ़े हैं। इसकी कई वजहों में पांच इस तरह हैं-
क्लाउड स्टोरज : क्लाउड ने कॉरपोरेट्स को लचीलेपन का बड़ा लाभ दिया है। इसके पे-एज-यू-गो मॉडल ने डिजिटल बदलाव को गति दी है और उद्यमिता को फलने-फूलने दिया है। हालांकि, जनता में इसकी गलत तस्वीर भी है। तथ्य तो यह है कि क्लाउड बडे़ पैमाने पर कंप्यूटिंग को सक्षम बनाते हैं। दुनिया के शीर्ष क्लाउड प्रदाता जैसे अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दौड़ रहे हैं, पर अभी भी कई तकनीकी दिक्कतें बनी हुई हैं।
रोबो का कदमताल : हैकर्स उद्यमों की सुरक्षा दीवार पर हमले के लिए आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निंग तकनीकी का इस्तेमाल कर परिष्कृत रोबो तैयार कर रहे हैं। इनसे बचाव के लिए भी उन्हीं तकनीकों का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में, रोबो के लिए दौड़ जारी है।
वर्क फ्रॉम होम रिवॉल्यूशन : रिमोट वर्क अब तारणहार  बन रहा है, पर यह सुरक्षा के लिए खतरनाक भी बन रहा है। घर में दफ्तरों जैसी सुरक्षा का माहौल नहीं होता। ऐसे में, हैकरों का हौसला बढ़ा है।
 5जी का कमाल : आने वाला समय 5जी का है। इंटरनेट की 5जी आधारित संरचना से सेंसर्स, कैमरेलैस होंगे। कई लाख बाइट्स के डाटा तैयार होंगे। इन डिवाइसों को हैक भी किया जा सकेगा। ड्राइवरलैस कार को हम पहले ही डिमॉन्सट्रेशन में देख चुके हैं।
नए रैंसमवेयर हमलावर और व्यापारिक मॉडल : रैंसमवेयर्स ने लाभ-मुखी कंपनी के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। वे पहले किसी संगठन के डाटा को लॉक कर देते हैं, फिर फिरौती मांगते हैं। वे हासिल डाटा को बेचकर दोहरी कमाई करते हैं। संघर्ष बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों की भविष्यवाणी है कि साइबर हमले ओपन इंटरनेट को ‘बंद’ या विभाजित कर सकते हैं। भारत में उदारीकरण की 30वीं वर्षगांठ पर यह विडंबनापूर्ण बयान है। एक अन्य प्रसंग में, इंटेल के एंडी ग्रोव एक प्रसिद्ध मुहावरा कहा करते थे, केवल दीवाने ही बचेंगे। आज साइबर संसार में यह जीवित रहने का मंत्र है। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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