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भारतीय श्रमबल में बढ़ने लगी युवा और महिला भागीदारी

भारत के श्रम बाजार के संबंध में दो हालिया घटनाक्रम हमारा ध्यान खींचते हैं। सबसे पहले, संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया कि दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश के रूप में भारत चीन से आगे निकल गया है...

भारतीय श्रमबल में बढ़ने लगी युवा और महिला भागीदारी
Amitesh Pandeyवी अनंत नागेश्वरन, अर्थशास्त्रीThu, 23 Nov 2023 11:06 PM
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भारत के श्रम बाजार के संबंध में दो हालिया घटनाक्रम हमारा ध्यान खींचते हैं। सबसे पहले, संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया कि दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश के रूप में भारत चीन से आगे निकल गया है, कामकाजी उम्र की आबादी में हमारी हिस्सेदारी अगले 13 वर्षों तक बढ़ेगी। दूसरा, प्रोफेसर क्लाउडिया गोल्डिन ने कार्यबल में महिला भागीदारी पर अपने काम के लिए अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता। ये खबरें पिछले माह भारत के वार्षिक आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के जारी होने के साथ मेल खाती हैं। साथ ही, इससे रोजगार में मौजूदा रुझानों को समझने में भी सहूलियत होती है। 
युवा रोजगार में वृद्धि हो रही है। भारत के उत्तरी व मध्यवर्ती राज्यों में युवा आबादी के साथ-साथ युवा रोजगार में भी वृद्धि हो रही है। पीएलएफएस के अनुसार, युवा (आयु 15 से 29 वर्ष) बेरोजगारी दर 2017-18 के 17.8 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 10 प्रतिशत हो गई है, जबकि युवाओं की श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 38.2 प्रतिशत से बढ़कर 44.5 हो गई है। साल 2021 में स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 6.90 करोड़ युवा, बिहार में 3.50 करोड़ युवा और मध्य प्रदेश में 2.30 करोड़ युवा हैं। उत्तर प्रदेश की बात करें, तो यहां युवा बेरोजगारी दर साल 2017-18 के 16.7 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 7.0 प्रतिशत हो गई है। भारत में युवाओं की आबादी बढ़ाने वाले राज्य भी अब युवा रोजगार में वृद्धि का नेतृत्व कर रहे हैं।
महिला श्रमबल भागीदारी दर में भी वृद्धि हुई है। महिलाओं में शिक्षा बढ़ी है। उनके नामांकन में भारी वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, उच्च माध्यमिक शिक्षा में महिला सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को लें, जो 2004-05 में 24.5 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 तक 58.2 प्रतिशत हो गया है। उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 6.7 प्रतिशत से चार गुना हो गया है। अब 27 प्रतिशत से अधिक महिलाएं उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने लगी हैं, इससे आने वाले दशकों में भारतीय कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ जाएगी। इससे भारत में कार्यबल की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। ध्यान रहे, भारत में एक-चौथाई आबादी 15 वर्ष से कम उम्र की और आधी से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है।
भारतीय कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। यह 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 37 प्रतिशत हो गई है। कामकाजी ्त्रिरयों की संख्या में वृद्धि के साथ ही स्व-रोजगार व कृषि कार्य में हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है। सबसे पहले, स्व-रोजगार की हिस्सेदारी में वृद्धि ग्रामीण उत्पादन में ्त्रिरयों के बढ़ते योगदान का संकेत है। यह कई कारणों से हुआ है, जिसमें कृषि उत्पादन में निरंतर उच्च वृद्धि व स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ ईंधन, स्वच्छता आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच के विस्तार से महिलाओं के समय व संसाधन की बचत हुई है। ‘कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव’ में प्रस्तुत एक शोध पत्र में यह निष्कर्ष सामने आया कि हर घर नल जल से भी कार्यबल में ्त्रिरयों की भागीदारी बढ़ी है। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट’ में भी इस तथ्य को दोहराया गया है।
दूसरी बात, जहां महिला कार्यबल की संरचना कृषि की ओर झुक रही है, वहीं पुरुष कार्यबल का झुकाव कृषि क्षेत्र से दूर हो रहा है। ग्रामीण महिला कार्यबल के बीच व्यवसाय के रूप में कृषि की हिस्सेदारी 2017-18 में 73.2 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 76.2 प्रतिशत हो गई है, वहीं ग्रामीण पुरुष कार्यबल में कृषि-हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से घटकर 49.1 प्रतिशत हो गई है। 
तीसरी बात, ग्रामीण महिला कार्यबल में कुशल कृषि श्रमिकों के बढ़ते अनुपात (2018-19 में 48 फीसदी से बढ़कर 2022-23 में59.4 प्रतिशत तक) और प्राथमिक कृषि श्रमिकों की हिस्सेदारी में गिरावट के चलते संरचनात्मक बदलाव हुआ है। ्त्रिरयों ने कृषि-कर्म छोड़ने वाले पुरुषों की भरपायी की है, यानी कृषि-कर्म का महिलाकरण कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है। यह आपदा या संकट प्रेरित लाभ का संकेत है और यह गंभीर कला सिनेमा से ज्यादा चक दे इंडिया जैसी सुखद कहानी है।
(साथ में दीक्षा एस बिष्ट) 

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