फोटो गैलरी

Hindi News ओपिनियन नजरियाऋषि सुनक की सियासी राह में गहराती मुश्किलें

ऋषि सुनक की सियासी राह में गहराती मुश्किलें

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ब्रिटेन में शरण चाहने वालों को रवांडा भेजने और उनके ब्रिटेन लौटने पर पाबंदी लगाने की उनकी विवादास्पद योजना को देश की...

ऋषि सुनक की सियासी राह में गहराती मुश्किलें
Pankaj Tomarहर्ष वी पंत, प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज लंदनMon, 20 Nov 2023 12:25 AM
ऐप पर पढ़ें

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ब्रिटेन में शरण चाहने वालों को रवांडा भेजने और उनके ब्रिटेन लौटने पर पाबंदी लगाने की उनकी विवादास्पद योजना को देश की शीर्ष अदालत ने गैर-कानूनी करार दिया गया है। अब सुनक ने घोषणा की है कि वह रवांडा के साथ एक औपचारिक संधि करने को तैयार हैं और इस योजना को पुनर्जीवित करने के लिए ‘अपने घरेलू कानूनी ढांचे पर नए सिरे से विचार करेंगे।’ लेकिन इन सबका औचित्य लोगों को समझ में नहीं आ रहा।
बीते हफ्ते की शुरुआत में प्रधानमंत्री सुनक द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल से ब्रिटेन की राजनीति में फिर एक नया मोड़ आया है। सुएला ब्रेवरमैन को गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करने और पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को विदेश मंत्री बनाए जाने को एक नाकाम नेता के हताश दांव के रूप में देखा जा सकता है, जिसके जरिये सुनक पार्टी के भीतर और बाहर अपना नेतृत्व बनाए रखना चाहते हैं। साथ ही, इसे अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले मुकाबले के लिए तैयार होने की एक नाटकीय पहल के रूप में भी देखा जा सकता है। आप इसे जिस भी तरीके से देखें, सुनक सुर्खियों में हैं, क्योंकि वह अपने निर्णयों के नतीजों की चपेट में हैं। पूर्व गृह मंत्री ब्रेवरमैन ने तो बाकायदा पत्र लिखकर सुनक पर ‘इंग्लिश चैनल’ को पार करके ब्रिटिश सीमा में आने वाली छोटी नौकाओं को रोकने के लिए हर मुमकिन कदम उठाने के अपने वादे से मुकरने काअरोप लगाया है। प्रधानमंत्री पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधते हुए ब्रेवरमैन ने लिखा है, ‘आपको ईमानदार होने की जरूरत है : आपकी योजना काम नहीं कर रही है। हमने रिकॉर्ड चुनावी हार का सामना किया है...और हमारे पास समय खत्म हो रहा है। आपको तत्काल अपनी विषय-वस्तु बदलने की जरूरत है।’
ब्रेवरमैन हमेशा से ही एक विवादित नेता रही हैं और बीते कुछ वर्षों में कंजरवेटिव पार्टी में उन्होंने अपने को एक मुखर दक्षिणपंथी आवाज के रूप में स्थापित किया है। लिज ट्रस सरकार में भी गोपनीय दस्तावेज साझा करने की गलती मानने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इस बार भी प्रधानमंत्री सुनक की हिदायतों को दरगुजर करते हुए ब्रेवरमैन ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप जड़ दिया। सुनक को लगा कि उनके नेतृत्व को चुनौती दी जा रही है, लिहाजा उन्होंने उनसे छुटकारा पाने में ही भलाई समझी। लेकिन ब्रेवरमैन शांत नहीं बैठने वालीं। वह सुनक के लिए शूल बनी रहेंगी। ब्रेवरमैन को हटाने और कैमरन को लाने से ऐसा प्रतीत होता है कि सुनक मानते हैं, अगले चुनाव के मद्देनजर एक मध्यमार्गी टोरी पार्टी कहीं बेहतर दांव है, क्योंकि यह डेविड कैमरन ही थे, जो लेबर पार्टी से वर्षों तक हारने के बाद टोरी को केंद्र में लाने और उन्हें जीतने लायक बनाने में कामयाब हुए थे। इसमें भी कोई दोराय नहीं कि कैमरन कूटनीति की दुनिया में अपना दबदबा बना सकते हैं, क्योंकि वह एक प्रसिद्ध हस्ती हैं और एक ऐसे समय में, जब ब्रिटिश विदेश नीति बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, वह अपने तईं इस मोर्चे पर कुछ हद तक स्थिरता ला सकते हैं।
भारत के लिहाज से देखें, तो डेविड कैमरन हाल के तमाम ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों में सबसे महत्वपूर्ण पीएम थे, क्योंकि उन्होंने भारत के बारे में ब्रिटेन के पुराने नजरिये को दूर झटक इसे एक उभरती ताकत के रूप में देखने की कोशिश की थी। बतौर प्रधानमंत्री साल 2010 की अपनी भारत यात्रा में उन्होंने किसी किस्म के ‘आतंकवाद के निर्यात’ के मसले पर पाकिस्तान को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी। भारत-पाकिस्तान विवाद में ब्रिटेन की किसी भी भूमिका को नकारते हुए उन्होंने भारत के साथ घनिष्ठ सुरक्षा साझेदारी का प्रस्ताव रखा। इससे भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नई गति आई, जो आज तक जारी है। 
यद्यपि कंजरवेटिव पार्टी के नवोन्मेषक के रूप में कैमरन सुनक के लिए अच्छा दांव है, पर उनकी पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ती जा रही है। ब्रेवरमैन को हटानेे और कैमरन को लाने से टोरीज की गतिशीलता में बदलाव की बहुत संभावना नहीं है। इसलिए, सुनक को आगे एक कठिन, लंबी राजनीतिक राह तय करनी है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें