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टीम इंडिया में युवा खिलाड़ियों ने जमाया अपना सिक्का

खेल हो या राजनीति, पीढ़िगत बदलाव थोड़ा मुश्किल होता है, भले ही वह बेहतरी के लिए होता है। क्रिकेट के अन्य प्रारूपों के मुकाबले टेस्ट क्रिकेट में यह बदलाव थोड़ा ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि इस...

टीम इंडिया में युवा खिलाड़ियों ने जमाया अपना सिक्का
Pankaj Tomarमनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकारMon, 19 Feb 2024 10:35 PM
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खेल हो या राजनीति, पीढ़िगत बदलाव थोड़ा मुश्किल होता है, भले ही वह बेहतरी के लिए होता है। क्रिकेट के अन्य प्रारूपों के मुकाबले टेस्ट क्रिकेट में यह बदलाव थोड़ा ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि इस प्रारूप में क्रिकेटरों के लिए पैर जमाना आसान नहीं होता है। भारतीय टेस्ट टीम में इस बदलाव की काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी, पर भारतीय यंग ब्रिगेड ने जिस तरह से इंग्लैंड की बैजबॉल का बाजा बजाकर दूसरा और तीसरा टेस्ट जीतकर सीरीज में 2-1 की बढ़त दिलाई है, उससे लगता है कि अब वे जिम्मेदारी संभालने को पूरी तरह से तैयार हैं। रनों के हिसाब से देखें, तो युवा खिलाड़ियों के बूते भारत ने अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। 434 रन से मिली जीत में बहुत सामान्य पृष्ठभूमि से आए युवा खिलाड़ियों, यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान, शुभमन गिल, विकेटकीपर धु्रव जुरेल का बड़ा योगदान है। 
इस सीरीज में अब तक ओपनर यशस्वी जायसवाल, तीसरे नंबर के बल्लेबाज शुभमन गिल, मध्य क्रम में भारत की नवीनतम खोज सरफराज खान और विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने ऐसी छाप छोड़ी है कि उन पर भरोसा किया जा सकता है। टेस्ट क्रिकेट का भविष्य संवारने वाले ये खिलाड़ी भारतीय टीम को मुश्किल हालात में मिले हैं। इस शृंखला के शुरू होने से पहले इंग्लैंड के कोच ब्रेंडन मैकुलम और कप्तान बेन स्टोक्स द्वारा शुरू की गई बैजबॉल का दुनिया भर में डंका बजा हुआ था। शृंखला शुरू होने से पहले भारत के दिग्गज विराट कोहली पारिवारिक आपात स्थिति की वजह से हट गए, इसके बाद लोकेश राहुल और श्रेयस अय्यर भी चोटिल हो गए।
नतीजा यह कि भारत पहला टेस्ट इंग्लैंड के हाथों बुरी तरह से हार गया। यह वह स्थिति थी, जब टीम प्रबंधन और चयन समिति के सामने यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया था कि चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे पुराने क्रिकेटरों को बुलाया जाए या नहीं, पर उन्होंने यंग ब्रिगेड पर ही भरोसा करने का फैसला किया और यह फैसला रंग जमाने वाला साबित हुआ है। अब भारत को ऐसे युवा क्रिकेटर मिल गए हैं, जिनके कंधों पर अगले दशक की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यह सही है कि इन युवाओं ने घरेलू स्थितियों में अच्छा प्रदर्शन किया है और उनकी ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी स्थितियों में परख होना बाकी है, लेकिन युवाओं ने भरोसा बढ़ा दिया है। 
बाईस वर्षीय भारतीय ओपनर यशस्वी जायसवाल ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, वैसा प्रतिभाशाली दशकों में सामने आता है। सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के रूप में ऐसी प्रतिभाएं सामने आ चुकी हैं। यशस्वी ने इस सीरीज में अब तक जिस तरह का प्रदर्शन किया है, वह सिलसिला बनाए रख सकें, तो उनका नाम इन दिग्गजों में शुमार होना तय है। वह लगातार दो टेस्टों में दोहरे शतक जमाने वाले चंद बल्लेबाजों में  शामिल हो गए हैं। बेशक, सरफराज खान और ध्रुव जुरेल, दो ऐसे युवा हैं, जिन्होंने पहले ही मैच में लोगों का दिल जीत लिया है। सरफराज पिछले तीन सीजन से घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाकर टेस्ट टीम का दरवाजा खटखटा रहे थे। वहीं ध्रुव ने तो अभी टेस्ट टीम में आने का सपना भी नहीं देखा था। कुछ समय पहले तक केएस भरत नंबर वन विकेट कीपर थे और इससे पहले ईशान किशन इस दौड़ में थे, लेकिन अब लगता है, ध्रुव टीम के पक्के सदस्य बन सकते हैं। सरफराज की रनों की भूख की कप्तान रोहित शर्मा ने भी तारीफ की है। वह पदार्पण टेस्ट में दो अर्द्धशतक लगाने में कामयाब रहे। इन युवाओं का चमकना वास्तव में क्रिकेट में मेहनत व लगन की जीत है। इससे लाखों युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। 
जरूरी है कि भारतीय टीम प्रबंधन रोहित शर्मा और विराट कोहली से आगे देखने की शुरुआत कर दे। हमें भविष्य के लिए टेस्ट खिलाड़ी मिल गए हैं। हालांकि, इनका भविष्य बहुत कुछ इस पर निर्भर रहने वाला है कि टीम प्रबंधन किस होशियारी से इनका इस्तेमाल करता है। मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ इन सभी से जूनियर स्तर से जुड़े रहे हैं, इसलिए वह इनकी प्रतिभा से परिचित हैं, अत: युवाओं को अनुभव का साथ मिलना तय है। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

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