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पैसे और नशे का घातक जोड़ तोड़ने की जरूरत 

जयंती रंगनाथन, कार्यकारी संपादक, हिन्दुस्तानNaman Dixit
Tue, 12 Oct 2021 11:26 PM
पैसे और नशे का घातक जोड़ तोड़ने की जरूरत 

लगभग तीस साल पुरानी बात है। बॉलीवुड में तब प्रोडक्शन हाउस और मल्टी नेशनल कंपनियों का बोलबाला नहीं था। फिल्मी गलियारों में यह बात आम थी कि फलां फिल्म में फलां ड्रग डीलर या माफिया का पैसा लगा है। उस वक्त के तमाम सितारों के बारे में यह सुना जाता था कि कैसे किसी खास अंडरवल्र्ड के बंदे के धमकाने के बाद वह किसी खास नायिका के साथ फिल्म में काम करने के लिए राजी हुआ है। 1990 के दशक में एक प्रेस वार्ता में पत्रकारों और कई नामी फिल्मकारों के बीच तीखी बहस और झड़प हो गई। मुद्दा था, बॉलीवुड में अंडरवल्र्ड और ड्रग माफिया का पैसा लगता है। कई नामी-गिरामी सितारे उनके इशारे पर काम करते हैं और नशे के आदी होते जा रहे हैं। मैं उस दुखद घटना की गवाह थी। 

सत्तर के दशक में मुंबई में अंडरवल्र्ड में एक नया नाम उभरा था, हाजी मस्तान का। उस समय फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करने वाली सोना मिर्जा के साथ उनके इश्क की खबरें सुर्खियों में थीं। हाजी मस्तान की वजह से सोना को फिल्मों में काम भी मिलता रहा, खासकर उन फिल्मों में, जिनमें मस्तान का पैसा लगता था। अस्सी के दशक में राम तेरी गंगा मैली  फेम मंदाकिनी और दाऊद इब्राहिम के रोमांस की चर्चा रही। नब्बे के दशक की चर्चित नायिका ममता कुलकर्णी ने तो ड्रग माफिया लॉर्ड विक्की गोस्वामी से शादी ही कर ली। तीन साल पहले मुंबई के उपनगर ठाणे में ममता को ड्रग्स सप्लाई करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। ममता का पति इन दिनों केन्या में जेल काट रहा है। इसके बाद मोनिका बेदी भी अंडरवल्र्ड के नामी बंदे अबु सलेम के इश्क में अपनी जिंदगी के कई साल गंवा बैठी। इन नामों का जिक्र इसलिए, क्योंकि बाद में यही नहीं, इनके जैसे कई अभिनेता और अभिनेत्री नशे की लत के बाद पैसा कमाने के लिए अपने भाई-बंधुओं को इसका आदी बनाने से बाज नहीं आए।
फिल्म पंडित और बाजार विश्लेषक इम्तियाज बताते  हैं, ‘ड्रग्स, नशा, माफिया और बॉलीवुड का रिश्ता बरसों से रहा है। यहां बहुत आसानी से ड्रग्स मिल जाता है। ज्यादातर स्ट्रगलर अपना गम गलत करने से इसकी शुरुआत करते हैं, फिर इसके आदी हो जाते हैं। इतने सालों में कई सितारे ड्रग्स की वजह से पकड़े गए, मगर इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह भी एक वजह है कि ड्रग्स का कारोबार बॉलीवुड को चपेट में लेता जा रहा है।’ पिछले साल युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी और हाल में सुपर स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स रखने के मामले में गिरफ्तारी के बाद बॉलीवुड फिर निशाने पर आ गया है। सुशांत सिंह मामले में तो उनकी महिला मित्र रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चंक्रवर्ती को ड्रग्स माफिया के साथ सांठगांठ की वजह से एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने गिरफ्तार किया था। उस समय अभिनेत्री कंगना रानौत का एक बयान आया था कि बॉलीवुड में 99 प्रतिशत लोग ड्रग्स लेते हैं। यह आंकड़ा अतिशोयक्तिपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह सही है कि संजय दत्त, फरदीन खान और न जाने कितने बड़े नाम ड्रग्स लेने की वजह से सुर्खियों में आए हैं। ये वे नाम हैं, जिन्हें नशे की लत के चलते इलाज करवाना पड़ा। 
यहां एक सवाल और उठता है। क्या सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही ड्रग्स की गिरफ्त में है? इसका सीधा सा जवाब है, नहीं। जहां कहीं पर पैसा है, वहां नशा है। एक बार मुझसे एक नामी निर्माता ने कहा था, ‘हम चूंकि लोगों के सामने रहते हैं, इसलिए बहुत आसानी से निशाना भी बनते हैं।’ राजनीति से लेकर हर तरह की पावर पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई होती है। रेव पार्टियों में जो नौजवान नशे में गोते लगा रहे होते हैं, उन सबमें बस एक ही समानता होती है, पैसा। वह पार्टी भी वैसी ही थी, जिसमें आर्यन खान को पकड़ा गया। आज कई लोग आर्यन के पक्ष में दलीलें दे रहे हैं। लेकिन आर्यन इस समय सिर्फ देश के नामी-गिरामी सुपर स्टार का युवा बेटा भर नहीं है। वह एक कड़ी है, नशे के उस नेटवर्क का, जो उससे होकर बहुत आगे तक जाता है। ड्रग्स के दुष्परिणाम इतने ज्यादा और भयंकर हैं कि ये पीढ़ियों को तबाह कर देते हैं। यह समय किसी एक अभिनेता पुत्र से सहानुभूति जताने का नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी को बचाने का है।

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