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8 मई, 2021|5:53|IST

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बायो बबल के सहारे भारत में रंगारंग क्रिकेट की वापसी 

भारत में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की दो साल के अंतराल के बाद बेहद मुश्किल हालात में वापसी होने जा रही है। इस टी-20 लीग का 13वां संस्करण कोरोना के प्रकोप की वजह से संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया था। आईपीएल के 14वें संस्करण की शुरुआत 9 अप्रैल को चेन्नई में पिछली चैंपियन मुंबई इंडियन्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के मैच से होने जा रही है। मौजूदा समय में मुंबई कोरोना का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भारत की इस व्यावसायिक राजधानी में प्रतिदिन दस हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं और वहां तमाम पाबंदियों के साथ रात का कफ्र्यू भी लगा हुआ है। पर आईपीएल आयोजकों को रात के कफ्र्यू के दौरान भी टीमों को होटल से स्टेडियम लाने-ले जाने, खिलाड़ियों के अभ्यास करने और मैच खेलने की अनुमति मिल गई है। 
वैसे इस माहौल में आयोजन को सफल बनाना बेहद चुनौती भरा है। खिलाड़ियों के बॉयो बबल में पहुंचने से पहले अब तक चार खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि एक बार खिलाड़ी बॉयो बबल में पहुंच जाएंगे, तब उनके इस वायरस की चपेट में आने की आशंका न के बराबर हो जाएगी। असल में बॉयो बबल का मतलब एक जोखिम मुक्त जगह है, इसमें पहुंचने वाले खिलाड़ियों और आयोजन से जुड़े लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क एकदम कट जाता हे। बीसीसीआई ने इस आईपीएल आयोजन के लिए 12 बॉयो बबल बनाए हैं। आठ फ्रेंचाइजी टीमों के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए हैं। दो बबल मैचों का संचालन करने वालों और मैचों का प्रबंधन देखने वालों के लिए हैं। इसके अलावा, दो बबल प्रसारण से जुड़े कमेंटेटरों और क्रू मेंबर्स के लिए बनाए गए हैं। आईपीएल में इस बार टीमों को घरेलू मैदान में खेलने का लाभ नहीं मिल सकेगा, क्योंकि इस बार मैच छह शहरों- मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, दिल्ली व अहमदाबाद में आयोजित किए जा रहे हैं। इस बार टीमों को लीग चरण में चार स्थानों पर ही खेलना होगा। इस चरण में उन्हें सिर्फ तीन बार यात्राएं करनी होंगी। कोरोना के जोखिम को कम करने के लिए यात्राओं पर लगाम लगाई गई है। दुनिया भर में कोरोना का प्रकोप बढ़ने से क्रिकेट में बॉयो बबल में खेलने की शुरुआत हुई है। पर हम भारतीय लिहाज से देखें, तो यह काम आसान नहीं है। यह काम मशक्कत वाला तो है ही, काफी महंगा भी है। हमारा बोर्ड दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड है, इसलिए उसके लिए इस खर्च के कोई खास मायने नहीं हैं, लेकिन भारत में अन्य खेल संगठनों के लिए इस तरह के बॉयो बबल बनाकर प्रतियोगिताओं का आयोजन खासा मुश्किल है। यही वजह है कि देश में कोरोना की पहली लहर के बाद हालात सुधरने पर भी खेल गतिविधियां गति नहीं पकड़ सकीं। आईपीएल का यह आयोजन क्रिकेट खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती की परख करने वाला भी होगा। बॉयो बबल में लगातार रहना मानसिक तौर पर थका देने वाला होता है, क्योंकि आप परिवार वालों के अलावा बाहरी दुनिया से एकदम से कट जाते हैं। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली कहते हैं कि भारतीय खिलाड़ी मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत और सहनशील होते हैं। इसलिए वे अपने को परिस्थितियों में ढालने में सक्षम रहते हैं। भारत के लगभग सभी प्रमुख खिलाड़ी विगत आईपीएल के समय से ही बॉयो बबल में हैं। यह सही है कि बीसीसीआई के लिए आईपीएल का सफल आयोजन बड़ी चुनौती है। जिन शहरों में आयोजन होना है, उन सभी में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आयोजन की वजह से यदि कोई परेशानी हुई, तो बीसीसीआई व राष्ट्र की प्रतिष्ठा को धक्का लग सकता है। इसलिए सतर्कता जरूरी है। क्रिकेटप्रेमियों को इस बार भी स्टेडियम जाकर मैच देखने का सौभाग्य हसिल नहीं होगा। आयोजकों ने शुरुआती मैच बिना दर्शक कराने का फैसला किया है और हालात सुधरने पर ही इस नीति में बदलाव की योजना है। पर कोरोना जिस तेजी से फैल रहा है, उससे दर्शकों का स्टेडियम में जाकर मैच का लुत्फ उठाने का सपना शायद ही साकार हो। इस आयोजन का एक सकारात्मक पक्ष यह भी है कि आईपीएल के मैच 30 मई तक देशवासियों को न सिर्फ घर में रहने को पे्ररित करेंगे, बल्कि उनका भरपूर मनोरंजन भी करेंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:hindustan nazariya column 09 april 2021