DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   ओपिनियन  ›  नजरिया  ›  आर्थिक चुनौतियों के बीच मानसून से उम्मीदें

नजरियाआर्थिक चुनौतियों के बीच मानसून से उम्मीदें

जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्रीPublished By: Manish Mishra
Fri, 07 May 2021 11:53 PM
आर्थिक चुनौतियों के बीच मानसून से उम्मीदें

इस समय देश में कोरोना की दूसरी घातक लहर के कारण घटते हुए औद्योगिक उत्पादन और बढ़ती हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र में सुकूनभरी उम्मीदों के दो चमकीले आधार दिखाई दे रहे हैं। एक, फसल वर्ष 2020-21 में खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान पेश किए गए हैं। और दूसरा, वर्ष 2021 में भारत में मानसून के अच्छे रहने के कयास लगाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी कोविड-19 की पहली लहर की चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था में कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जिसने वृद्धि की। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान जहां देश की जीडीपी में बड़ी गिरावट आई, वहीं कृषि विकास दर में करीब 3.4 फीसदी की वृद्धि होने से जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 17.8 फीसदी से बढ़कर 19.9 फीसदी पर पहुंचती दिख रही है। निस्संदेह, कोरोना की चुनौतियों के बीच देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का चमकीला अध्याय दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक, फसल वर्ष 2020-21 के लिए मुख्य फसलों के दूसरे अग्रिम अनुमान में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 303.34 मिलियन टन अनुमानित है। पिछले वर्ष 2019-20 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन 297.50 मिलियन टन था। इतना ही नहीं, फसल वर्ष 2021-22 के खरीफ सीजन में रिकॉर्ड 104.3 मिलियन टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय खाद्य निगम के मुताबिक, देश में 1 अप्रैल, 2021 को सरकारी गोदामों में करीब 77.23 मीट्रिक टन खाद्यान्न का सुरक्षित भंडार है, जो बफर आवश्यकता से करीब तीन गुना अधिक है। ऐसे में, वर्ष 2021 में कोरोना की चुनौतियों के बीच एक बार फिर 23 अप्रैल को केंद्र सरकार द्वारा घोषित की गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लाभार्थियों तक खाद्यान्न की अतिरिक्त आपूर्ति को भी सरलता से पूरा किया जा सकेगा।

वस्तुत: अच्छे मानसून की उम्मीद के कारण एक बार फिर फसल वर्ष 2021-22 में पिछले साल की तुलना में अधिक खाद्यान्न उत्पादन होने की संभावना दिख रही है। भारतीय मौसम विज्ञान और अन्य वैश्विक मौसम एजेंसियों द्वारा वर्ष 2021 में सामान्य मानसून के जो अनुमान प्रस्तुत किए गए हैं, उससे भी कृषि उत्पादन ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना है। इसका देश के आर्थिक-सामाजिक, सभी क्षेत्रों पर सकारात्मक असर होगा। साथ ही कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रही अर्थव्यवस्था की चिंता बहुत कुछ कम होगी। हालांकि, कृषि क्षेत्र की प्रगति के लिए अच्छे मानसून का लाभ लेने के साथ-साथ कई बातों पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकार द्वारा कृषि उपज का अच्छा विपणन सुनिश्चित करना होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में मांग में वृद्धि हो सकेगी। ग्रामीण मांग बढ़ने से गांवों में विनिर्माण और सेवा के क्षेत्र बढ़ सकेंगे। मनरेगा और पीएम गरीब कल्याण रोजगार अभियान के माध्यम से गांवों में लौटे श्रमिकों के लिए रोजगार मुहैया कराने के लिए अतिरिक्त फंड का आवंटन करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे और कुटीर उद्योगों को सरल ऋण मिलना भी सुनिश्चित करना होगा। खराब होने वाले कृषि उत्पादों, जैसे फलों और सब्जियों के लिए लॉजिस्टिक्स सुदृढ़ करना होगा। पिछले वर्ष से शुरू की गई किसान ट्रेनों के जरिए कृषि एवं ग्रामीण विकास को नया आयाम देना होगा। सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के जिस कृषि बुनियादी ढांचा कोष का निर्माण किया है, उसे शीघ्रतापूर्वक आवंटन करना होगा। अच्छे कृषि बुनियादी ढांचे से फसल तैयार होने के बाद होने वाले नुकसान में कमी आ सकेगी। इससे छोटे किसानों को ऐसी ताकत मिलेगी कि वे अपने उत्पादों को खुद के गोदाम बनाकर बेहतर देखभाल कर सकेंगे, और अपनी फसल को उपयुक्त समय पर बेचकर बेहतर दाम पा सकेंगे। उम्मीद है, सरकार बेहतर कृषि के लिए चालू वित्त वर्ष 2021-22 के बजट के तहत कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए घोषित की गई विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर तेजी से आगे बढ़ेगी। जैसे कोरोना की पहली लहर के बीच वर्ष 2020 में कृषि भारत की आर्थिक शक्ति बनी, वैसे ही इस दूसरी घातक लहर से निर्मित आर्थिक चुनौतियों के बीच एक बार फिर कृषि ही आर्थिक सहारे के रूप में दिखाई दे सकती है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

संबंधित खबरें