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डिजिटल कारोबारी सुविधाओं में भारत के बढ़ते कदम

जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्रीPublished By: Naman Dixit
Mon, 02 Aug 2021 10:42 PM
डिजिटल कारोबारी सुविधाओं में भारत के बढ़ते कदम

इन दिनों पूरी दुनिया में एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) द्वारा प्रकाशित डिजिटल एवं टिकाऊ व्यापार सुविधा वैश्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 की खूब चर्चा है। इस सर्वेक्षण में दुनिया की 143 अर्थव्यवस्थाओं के तहत व्यापार की पारदर्शिता, संस्थागत प्रावधान व सहयोग, कागज रहित व्यापार एवं सीमा पार कागज रहित व्यापार जैसी मुख्य कसौटियों पर भारत ने 90.32 फीसदी अंक हासिल किए हैं। दो वर्ष पहले किए गए इसी सर्वेक्षण में भारत को 78.49 प्रतिशत अंक मिले थे। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल एवं टिकाऊ व्यापार सुविधा में कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। 
गौरतलब है, इस सर्वेक्षण में भारत का समग्र स्कोर फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, नॉर्वे, फिनलैंड आदि कई देशों के मुकाबले अधिक पाया गया है। भारत ने पारदर्शिता सूचकांक के लिए 100 फीसदी और व्यापार में महिलाओं की भागीदारी के मामले में 66 फीसदी अंक हासिल किए हैं। यह महत्वपूर्ण है कि डिजिटल एवं टिकाऊ व्यापार सुविधा पर यूएनईएससीएपी रैंकिंग में सुधार के लिहाज से भारत दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया क्षेत्र और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की तुलना में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला देश है। 
कोरोना-काल की देश-दुनिया की कारोबारी गतिविधियां तेजी से ऑनलाइन हुई हैं। वर्क फ्रॉम होम व आउटसोर्सिंग को व्यापक तौर पर बढ़ावा मिलने से भारत में डिजिटल कारोबार की अहमियत काफी बढ़ी है। महामारी के दौरान भारत के आईटी सेक्टर द्वारा समय पर दी गई गुणवत्तापूर्ण सेवाओं से वैश्विक उद्योगों का भारत की आईटी कंपनियों पर भरोसा बढ़ा है। चीन से मोहभंग होने के कारण भी भारत के डिजिटल कारोबार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। अमेरिकी टेक कंपनियों सहित दुनिया की कई कंपनियां भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि तथा रिटेल सेक्टर में ई-कॉमर्स बाजार की अपार संभावनाओं को अपनी मुट्ठी में करने के लिए निवेश के साथ आगे बढ़ी हैं। अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की बड़ी कंपनियां नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय आईटी प्रतिभाओं के जरिये नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत में अपने ग्लोबल इनहाउस सेंटर (जीआईसी) तेजी से बढ़ा रही हैं। दरअसल, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उत्साहजनक स्टार्टअप माहौल के चलते वैश्विक कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। भारत में डिजिटल कारोबार सुविधाओं के बढ़ने और कारोबारी सुगमता में बेहतरी का संकेत वल्र्ड बैंक की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2020’ रिपोर्ट से भी मिलता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 190 देशों की सूची में अब 63वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2019 में इस सूची में यह 77वें स्थान पर था। यानी 14 पायदान का सुधार! विश्व बैंक ने भारत को कारोबार का माहौल सुधारने के मामले में नौवां सर्वश्रेष्ठ देश बताया है। विश्व बैंक के मुताबिक, भारत ने जिन चार क्षेत्रों में बडे़ सुधार किए हैं, वे हैं- बिजेनस शुरू करना, दिवालियापन के मुद्दे का समाधान करना, सीमा पार व्यापार को बढ़ाना और कंस्ट्रक्शन परमिट में तेजी लाना। इसमें कोई दो मत नहीं कि डिजिटल व टिकाऊ कारोबार सुविधाओं पर आधारित मजबूत बुनियाद और बडे़ बाजार की वजह से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफआई) तेजी से बढ़ा है। वित्त मंत्री के मुताबिक, वर्ष 2020 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह 25.4 फीसदी बढ़कर 64 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दुनिया में एफडीआई प्राप्त करने के मामले में भारत वर्ष 2019 में आठवें स्थान पर था, जो 2020 में पांचवें स्थान पर आ गया है। साफ है, डिजिटल एवं टिकाऊ व्यापार के कारण भारत लाभ की स्थिति में है। पर अभी सीमित संख्या में ही डिजिटल कौशल में दक्ष प्रतिभाएं कारोबार की जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। देश को बड़ी संख्या में युवाओं को नई तकनीकी योग्यताओं के साथ एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग व अन्य नए डिजिटल कौशल में दक्ष करना होगा। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में देश को आगे बढ़ाना होगा। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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