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28 नवंबर, 2020|10:50|IST

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प्रौद्योगिकी संग आगे बढ़ते हुए पीछे भी लौटते हम

हिंदू पुराणों में  राजा काकुदमी की कथा आती है, जिन्होंने जगत के निर्माता ब्रह्मा से मिलने के लिए ब्रह्म लोक की यात्रा की थी। काकुदमी ने सोचा था कि यह एक छोटी यात्रा होगी, लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटे, तो यह जानकर चौंक गए कि पृथ्वी पर 108 युग बीत चुके हैं। ध्यान रहे, हर युग लगभग 40 लाख वर्ष का होता है। ब्रह्मा ने हैरान काकुदमी को समझाया कि समय अस्तित्व के विभिन्न विमानों पर अलग-अलग तरीके से चलता है।
आज भी समय आश्चर्यजनक गति से आगे बढ़ता हुआ प्रतीत हो रहा है और इसमें भी प्रौद्योगिकी ही अन्य बलों की तुलना में ज्यादा तेजी से बदलाव को गति दे रही है। मूरे के नियम के अनुसार, कंप्यूटिंग शक्ति हर 18 महीने में दोगुनी हो जाती है। मेटकॉफ के नियम के अनुसार, फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्क कुछ ही वर्ष में दुनिया में अपने दायरे को दोगुना कर देते हैं। कार्लसन कर्व के अनुसार, इसी अनुपात में डीएनए अनुक्रम में भी वृद्धि होती  रहती है। एक आधुनिक काकुदमी भले कुछ शताब्दियों के लिए भी संसार से अनुपस्थित रह जाएं, तो दुनिया को पहचानने में नाकाम हो जाएंगे। लेकिन अगर आप थोड़ी बारीकी से देखें, तो लगता है, प्रौद्योगिकी दुनिया के भविष्य और अतीत, दोनों को साथ ला रही है। 
1799 में जब पियरे ने मिश्र में रोसेटा स्टोन की खोज की, तो दुनिया को आखिरकार पता चला कि प्राचीन मिश्र के लोगों का क्या योगदान है कि उन्होंने पत्थर पर चित्र क्यों उकेरे थे। उन चित्रों ने ही अक्षर और लेखन को, फिर पाठ को टाइप करने और संदेश बनाकर आगे बढ़ाने का रास्ता दिया था। देखिए, आज अधिकांश बच्चे चित्रों के जरिए फिर से लिखने लगे हैं, इमोजी के साथ, यह तकनीकी युग की चित्र-लिपि है। कहा जाता है, प्राचीन गांवों में बार्टर सिस्टम (वस्तु विनिमय) का उपयोग होता था, उसके बाद ही कौड़ी, मोती और उसके बाद सिक्कों, मुद्राओं का आगमन हुआ। आज इबेज और बिटटोरेंट्स के साथ प्रौद्योगिकी हमें फिर बार्टर व्यवस्था में ले जा रही है। बहुत ज्यादा दिन नहीं बीते, हर इलाके की अपनी मुद्रा होती थी, लेकिन तब भी बार्टर के रूप में आपके पास खुद की मुद्रा होती थी, और अब क्रिप्टोग्राफी और ब्लॉकचेन के साथ है। हर व्यक्ति की अपनी क्रिप्टोकरेंसी है। हम वैक्स मोहर के जरिए दस्तावेजों को सील करते थे, जिस पर अपनी खुद की उंगलियों के निशाने बनाते थे, अब प्रौद्योगिकी फिंगरप्रिंट्स व अन्य बायोमेट्रिक्स को फिर हमारे दरवाजे पर पहचान पत्रों व फोन के जरिए ले आई है।
काकुदमी के समय में सब कुछ व्यक्तिश: या हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग बनाया जाता था, कपड़ा हो या हथियार। बाद में बड़े पैमाने पर कपड़े या हथियार का निर्माण होने लगा, लेकिन अब हम फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य तकनीक के जरिए हर चीज को निजीकृत करने या व्यक्तिश: बनाने में जुटे हैं। अब हम तकनीक के जरिए यह देखने लगे हैं कि हमारी सब्जियां कहां से आ रही हैं, कहां उग रही हैं। कोरोना के समय हमने समूह में काम करने के बजाय अकेले-अकेले काम करना शुरू कर दिया है, पहले ऐसा ही था। अकेले-अकेले बैठकर पढ़ रहे हैं, प्रौद्योगिकी ने इसे संभव बना दिया है। पहले आदिवासी नेताओं ने हम पर शासन किया था, काकुदमी भी शायद उनमें से एक थे। अब सोशल नेटवर्क ने हमें वापस अपनी जाति-बिरादरी के नेताओं को चुनने के लिए प्रेरित किया है। 
भविष्य की ओर जारी यात्रा की व्याख्या करना कठिन है, जो वास्तव में हमें अपने अतीत की ओर भी ले जा रही है। ब्रह्मा ने यह बात काकुदमी को समझाने की कोशिश की थी; शायद, इसे समय की पुरानी और भारतीय अवधारणा द्वारा ही बेहतर ढंग से समझाया जा सकता है। जहां समय आदि और अंत या अतीत और भविष्य के साथ एक रेखा पर नहीं चल रहा है, समय तो कालचक्र है। समय घूमते हुए हमें वापस उसी स्थान पर ले आता है, जहां से हमने शुरू किया था। यह कुछ ऐसा है, जो शायद अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग में आ गया था, जब उन्होंने अपनी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को समझाने के लिए अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ पेश किया था। या शायद वह अमेरिकी रैपर स्नूप डॉग था, जिसने इसे सबसे अच्छे से समझा, जब उसने कहा, ‘अगर आपको समय में पीछे जाना है, तो आपको आगे बढ़ना होगा’। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:hindustan nazariya column 02 november 2020