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Hindi News ओपिनियन नजरियाअपना बोया बबूल ही काटने को मजबूर यूरोपीय नेता

अपना बोया बबूल ही काटने को मजबूर यूरोपीय नेता

यूरोप एक बगीचा है और दुनिया का बाकी ज्यादातर हिस्सा जंगल है। जंगल कभी बगीचे पर हमला कर सकता है। कुछ दिनों पहले यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने युवा यूरोपीय राजनयिकों की एक बैठक में...

अपना बोया बबूल ही काटने को मजबूर यूरोपीय नेता
Pankaj Tomarसंदीपन देब, वरिष्ठ पत्रकारTue, 01 Nov 2022 12:19 AM
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यूरोप एक बगीचा है और दुनिया का बाकी ज्यादातर हिस्सा जंगल है। जंगल कभी बगीचे पर हमला कर सकता है। कुछ दिनों पहले यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने युवा यूरोपीय राजनयिकों की एक बैठक में इस भावना का इजहार किया। उन्होंने अपने श्रोताओं को जंगल जाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, ‘आपका कर्तव्य सिर्फ बगीचे की देखभाल करना नहीं, बल्कि बाहर के जंगल की देखभाल करना होगा।’
बोरेल के शब्दों से गलत भावना के संकेत मिल रहे थे, उन्हें माफी मांगनी पड़ी, लेकिन क्या उन्होंने जो कहा, उससे हमें आश्चर्य होना चाहिए? बोरेल ने जो कुछ भी कहा है, वह बहुत साफ है। यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर जो लोग ध्यान दे रहे हैं, वो अच्छे से समझ रहे होंगे। दरअसल, बोरेल की इच्छा यह बताने की है कि पश्चिम और उसके नेताओं ने दुनिया में वास्तव में नस्लवाद और उपनिवेशवाद को कभी बढ़ावा नहीं दिया है। 
युद्ध के शुरुआती दिनों में प्रमुख ब्रिटिश और अमेरिकी समाचार चैनलों के संवाददाताओं ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि नीली आंखों और सुनहरे बालों वाले लोग, जो अपेक्षाकृत सभ्य माने जाते हैं, एक ऐसे देश में मारे जा रहे हैं, जो इराक या अफगानिस्तान नहीं है। दूसरी ओर, याद कीजिए, भारत जब रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मुताबिक नहीं चल रहा था, तब एक अमेरिकी नौकरशाह सार्वजनिक रूप से परिणाम की चेतावनी देने के लिए नई दिल्ली पहुंच गया था। दरअसल, बोरेल यह सुझाव देना चाहते हैं कि यूरोप नैतिक रूप से दुनिया के बाकी हिस्सों से बेहतर है, इसलिए सभी को उसके नेतृत्व को मानना चाहिए। यूरोप राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक समृद्धि व सामाजिक सामंजस्य का सर्वोत्तम संयोजन है। हालांकि, यह भी माना जाता है कि होमो सेपियन्स के यूरोपीय ताज की महिमा इतिहास में बेजोड़ है, जो सदियों तक लूट-पाट और नरसंहार के जरिये हासिल की गई है। 

सितंबर में ही यूरोपीय संघ ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए तंजानिया-युगांडा तेल पाइपलाइन परियोजना को समाप्त करने की अपील की है। दोनों देशों ने यूरोपीय संघ से पीछे हटने को कहा। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने यूरोपीय संघ को असहिष्णु, उथला, अहंकारी तक कहा। ऊर्जा संकट झेल रहे यूरोप को कुछ सप्ताह पहले ही बड़ा झटका लगा है, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने तेल उत्पादन में कटौती कर दी है। 
सवाल है, यूरोपीय बगीचे का असली मालिक कौन है? अपने भाषण में बोरेल ने कहा कि यूरोपीय संघ अब अमेरिका का आंख बंद करके अनुसरण नहीं कर रहा है। हालांकि, जब से युद्ध शुरू हुआ है, ऐसा लगता है कि यूरोप वाशिंगटन से ही सारे संकेत ले रहा है, साथ ही अमेरिका की तुलना में युद्ध की ज्यादा कीमत चुका रहा है। यूरोपीय संघ के देश अमेरिका व चीन से उच्च दरों पर गैस खरीद रहे हैं, जो उन्हें रूसी गैस का ही अच्छे लाभ पर पुनर्विक्रय कर रहे हैं। अभी तक युद्ध में रूस व यूरोप, दोनों हारे हुए हैं, लेकिन कोई तो जीता होगा। इस युद्ध को यकीनन जंगल में जाने वाले बागवानों ने अपरिहार्य बना दिया था। मॉस्को के विरोध के बावजूद अमेरिकी नेतृत्व ने नाटो के सैन्य ठिकानों को रूस के करीब ले जाना जारी रखा। इस बात के अकाट्य प्रमाण हैं कि अमेरिका ने यूक्रेन में 2014 की ‘ऑरेंज रिवॉल्यूशन’ का वित्त पोषण किया था, तब मास्को समर्थित और लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति को देश से भागना पड़ा था। तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जो बाइडन अमेरिका की यूक्रेन नीति के प्रभारी थे। शासन में उस बदलाव के तुरंत बाद उनके बेटे हंटर बाइडन 50,000 डॉलर के मासिक वेतन पर एक यूक्रेनी ऊर्जा फर्म, बरिस्मा के बोर्ड में शामिल हो गए थे। रूस के व्लादिमीर पुतिन ने क्रीमिया पर कब्जा करके ‘ऑरेंज क्रांति’ का जवाब दिया था। 

यूक्रेन युद्ध के कारण आज यूरोप गहरी मंदी की ओर बढ़ रहा है। बगीचे पर हमले हो रहे हैं, लेकिन नुकसान के लिए काफी हद तक बागवान खुद जिम्मेदार हैं। यूरोप गिरावट की ओर जा रहा है और गिरावट तब तक नहीं रुकेगी, जब तक इसके नेताओं को यह एहसास नहीं हो जाता कि उनके साम्राज्य की उम्र बहुत हो गई है और उनकी श्रेष्ठता, वैश्विक प्रभाव की धारणा एक भ्रम है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)