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डेविस कप मुकाबले पर संकट के बादल

भारत और पाकिस्तान के खेल संबंध दोनों देशों के राजनीतिक माहौल पर निर्भर करते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले काफी समय से संबंध तनाव भरे होने की वजह से एक-दूसरे के यहां आकर खेलने पर विराम लगा हुआ है। काफी अरसे के बाद भारतीय डेविस कप टीम के पाकिस्तान जाने की संभावना बनी थी। उम्मीद थी कि यह मुकाबला दोनों देशों के बीच खेल संबंध बनाने में पुल का काम कर सकता है। मगर दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ने से इस्लामाबाद में अगलेे महीने डेविस कप एशिया-ओसेनिया ग्रुप एक मुकाबले के आयोजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय डेविस कप टीम 1964 के बाद से कभी पाकिस्तान नहीं गई है।

भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद उसे केंद्रशासित क्षेत्र बनाने की प्रतिक्रिया में पाकिस्तान के भारत से राजनयिक संबंध तोड़ने के फैसले के बीच डेविस कप मुकाबला हो पाने की संभावनाएं न के बराबर हैं। बहुत संभव है कि पाकिस्तान से खेलने का ही विरोध होने लगे। इस स्थिति में अखिल भारतीय टेनिस ऐसोसिएशन (एआईटीए) सोच रही थी कि वह इस मुकाबले को किसी तटस्थ स्थान पर कराने की इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) से मांग करे, पर उसके भी मायने नहीं रह जाएंगे। एआईटीए मुकाबले को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर ही करेगी, पर सुरक्षा का जायजा लेने की आईटीएफ की अपनी व्यवस्था है।

एआईटीए के सचिव हिरण्मय चटर्जी ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीएफ की है, इसलिए वह हमारी मांग को हल्के से नहीं लेगी। इन हालात में मुकाबले का स्थान बदलने की उम्मीद की जा सकती है। अभी तो पाकिस्तान टेनिस एसोसिएशन भी इस मामले में सहयोगी रुख अपनाए हुए है। पर हालात और बिगड़ते हैं, तो उनका रुख सहयोग भरा रहेगा, कहना मुश्किल है। भारत के कल्याणी में 21 अगस्त से शुरू होने वाली सैफ अंडर-15 फुटबाल चैंपियनशिप से पाकिस्तान का एकाएक हटना स्थिति बिगड़ने की तरफ ही इशारा करती है।

भारत के लिए एशिया-ओसेनिया ग्रुप एक का यह डेविस कप मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है। मुकाबला जीतने से ही उसकी विश्व ग्रुप में स्थान बनाने के लिए खेलने की राह बनेगी। भारत इसे नहीं खेलता है, तो अगले साल उसे ग्रुप दो में खेलना पड़ेगा। असल में, आईटीएफ मुकाबला छोड़ने के मामले में सख्त रुख अख्तियार करने वाली है। अभी कुछ समय पहले हांगकांग ने सुरक्षा के हवाले से पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था, इस पर आईटीएफ ने उसे एक ग्रुप नीचे लुढ़का दिया था। लेकिन भारत का मामला इससे थोड़ा भिन्न है। यहां दोनों देशों के बीच तनावभरा माहौल है और इस माहौल में और गरमाहट आने की आशंकाएं बनी हुई हैं।

खेल मंत्रालय खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित तो है, पर वह चाहता है कि डेविस कप टीम पाकिस्तान भेजी जाए या नहीं, यह फैसला अखिल भारतीय टेनिस ऐसोसिएशन करे। वैसे खिलाड़ियों की सुरक्षा का जिम्मा भारत सरकार का ही है। यह मामला तो जल्द ही निपट जाएगा, पर देश में पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है। मुंबई में आतंकवादी हमले के बाद से भारत के पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंध किसी न किसी रूप में बंद से हैं। दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा अहमियत क्रिकेट संबंधों को लेकर है। दोनों देश आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में ही आपस में खेलते हैं। पर कई बार कोई बड़ी आतंकवादी वारदात हो जाती है, तो पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी बॉयकॉट करने की मांग हो जाती है।

पिछले दिनों क्रिकेट विश्व कप के दौरान भी ऐसा ही माहौल था, इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ मैच में नहीं खेलने की जोरदार मांग की गई थी। लेकिन सरकार की ओर से कोई दबाव न होने के कारण भारत खेला और पाकिस्तान को हराकर खूब वाह-वाही बटोरी। यह सच है कि भारत और पाकिस्तान के खेल संबंधों का एक विरोधी वर्ग दोनों ही देशों में है। वह समय-समय पर अपना विरोध जताता रहता है। इस वर्ग के लिए सबसे ज्यादा अहमियत क्रिकेट की है। बाकी खेल क्रिकेट की तरह सुर्खियां नहीं बटोरते, इसलिए उसे लेकर ऐसा माहौल नहीं बनाया जाता।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:Hindustan Nazaria Column August 10