Hindustan Nazaria Column 24th January 2020 - सबसे छोटे फॉर्मेट में इस साल की सबसे बड़ी चुनौती DA Image
20 फरवरी, 2020|7:44|IST

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सबसे छोटे फॉर्मेट में इस साल की सबसे बड़ी चुनौती

यह दिलचस्प है कि खेल के सबसे बड़े और पारंपरिक फॉर्मेट की नंबर एक टीम सबसे छोटे फॉर्मेट में नंबर पांच पर है। मौजूदा आईसीसी रैंकिंग में भारतीय टीम नंबर एक टेस्ट टीम है, नंबर दो वनडे टीम है, लेकिन ट्वंटी-20 में उसका पायदान पांचवां है। यह और दिलचस्प है कि खेल के सबसे छोटे फॉर्मेट, यानी टी-20 की सबसे बड़ी लीग भारत में ही खेली जाती है। इसमें भारतीय टीम का लगभग हर खिलाड़ी खेलता है। बावजूद इसके टी-20 मुकाबलों में टीम इंडिया पिछड़ जाती है। ऐसे में, भारतीय फैंस को चिंता इसलिए हो रही है, क्योंकि इस साल ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर जो विश्व कप खेला जाना है, वह भी ट्वंटी-20 फॉर्मेट का है।

इन दिलचस्प बातों और फिक्र के बीच ही आज से भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच टी-20 मैचों की सीरीज खेलने के लिए मैदान में उतरेगी। यह मैच ऑकलैंड में खेला जाना है। टेस्ट क्रिकेट या वनडे के मुकाबले टी-20 में भारतीय टीम की कमजोर स्थिति का एक और उदाहरण यह भी है कि न्यूजीलैंड के पिछले दौरे में भारतीय टीम ने वनडे सीरीज में तो एकतरफा जीत हासिल की थी, लेकिन ट्वंटी-20 सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। अब यह सवाल मन में जरूर आता है कि इसकी वजह क्या है? अगर तीनों टीमों में लगभग एक जैसे खिलाड़ी खेल रहे हैं, तो टेस्ट मैच और एकदिवसीय मैच, दोनों ही फॉर्मेट के मुकाबले टी-20 में हम पिछड़ते क्यों हैं?

टी-20 वह फॉर्मेट है, जिसमें गलतियों को सुधारने का मौका बहुत कम मिलता है। चंद गेंदों में मैच का फैसला इधर से उधर हो जाता है। यही वजह है कि टी-20 के स्पेशलिस्ट खिलाड़ी होते हैं। टीम इंडिया की दिक्कत यह है कि टी-20 में भी जीत दिलाने का जिम्मा उन्हीं तीन-चार खिलाड़ियों पर रहता है, जिनके भरोसे हम वनडे या टेस्ट मैच जीतने का ख्वाब देखते हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा, केएल राहुल, जसप्रीत बुमराह चल गए तो ठीक, वरना नतीजा विरोधी टीम के पक्ष में। वजह बड़ी साफ है ट्वंटी-20 में टीम इंडिया का मध्य-क्रम अभी तक संतुलित नहीं हो पाया है।

तेज गति से रन बनाने की क्षमता रखने वाले बल्लेबाज अब भी विराट कोहली को नहीं मिले हैं। हार्दिक पांड्या इस रोल के लिए बिल्कुल मुफीद थे। लेकिन वह फिट नहीं हैं। विराट कोहली ने दूसरा दांव ऋषभ पंत पर खेला। तमाम विरोध के बाद भी ऋषभ पंत को लगातार मौके दिए। लेकिन पंत अभी अपनी परिपक्वता की शुरुआती सीढ़ियों पर भी लड़खड़ा रहे हैं। बल्लेबाजी के अलावा विकेटकीपिंग में भी उनका प्रदर्शन बहुत लचर है। हालांकि अब भी उनके बारे में यही बयान आ रहे हैं कि वह बहुत प्रतिभाशाली हैं। वह प्रतिभा मैदान में कब दिखेगी, इसकी कोई ‘डेडलाइन’ तय नहीं है। मनीष पांडे को टी-20 फॉर्मेट में खेलते हुए पांच साल हो गए हैं, लेकिन अब भी वह अपनी जगह स्थाई नहीं कर पाए हैं। शिवम दुबे, शार्दुल ठाकुर, श्रेयस अय्यर जैसे खिलाडि़यों को भी अभी अपनी उपयोगिता साबित करनी है। कुल मिलाकर, जिस संतुलन की जरूरत जीत के लिए होती है, टीम इंडिया अभी उससे दूर है। टी-20 फॉर्मेट की बड़ी टीमों के खिलाफ कम मैच खेलना भी भारत के पक्ष में नहीं जाता।

अगले दस दिन में विराट कोहली को इस परेशानी का हल तलाशना है, क्योंकि यूं तो न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सीरीज एक आम सीरीज भर है, लेकिन इसके रास्ते टी-20 विश्व चैंपियन की मंजिल तक जाते हैं। टीम के कोच रवि शास्त्री साफ कह चुके हैं कि यह सीरीज विश्व कप की तैयारियों का प्लेटफॉर्म है। न्यूजीलैंड पहुंचने के बाद उन्होंने यह भी कहा था कि टीम इंडिया अब टॉस, मैदान, मौसम या विरोधी टीम की परवाह किए बगैर खेलती है। विश्व कप का जुनून अब भी टीम के सिर पर है और इस लक्ष्य को खिलाड़ी पूरा करेंगे। इस बयान की सच्चाई टीम इंडिया को ही साबित करनी है। भूलना नहीं चाहिए कि 2019 विश्व कप में कैसे विश्व चैंपियन बनने का सपना टूटा था। सपना तोड़ने वाली टीम भी न्यूजीलैंड ही थी। राहत की बात यह है कि साल 2020 की शुरुआत में भारतीय टीम ने श्रीलंका को टी-20 सीरीज में हराया है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को भी वनडे सीरीज में धोया है। यह आत्मविश्वास टीम के काम आएगा। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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