DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शत-प्रतिशत की परीक्षा का खेल

जीएम साहेब परेशान थे। लालाजी ने जो जिम्मेदारी उनके सिर पर पटक दी थी, वह अच्छी-खासी चुनौती बन गई थी। लालाजी ने अपने पूज्य पिताजी की स्मृति में दो छात्रों को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए 2,000 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति देने का फैसला किया था। दो सही उम्मीदवारों के चयन का काम उन्होंने जी एम साहेब को सौंपा था।

मानव संसाधन विभाग द्वारा सुझाए गए दस नामों में से किन्हीं दो को चुनना बहुत कठिन काम भी नहीं था। दिक्कत यह थी कि दस में से सात को बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक मिले थे, बाकी दो को 99 प्रतिशत। उन्होंने तय किया कि एक आसान सी लिखित परीक्षा लेकर दो को चुन लेंगे। पर सबने वाकआउट कर दिया कि पर्चा बहुत कठिन था। 

उनसे एक दिन की छुट्टी के लिए प्रार्थनापत्र लिखने को कहा गया था। विभाग ने समझाया कि परीक्षा का यह तरीका घिसा-पिटा है। इसे ऐसे पूछा जाना चाहिए था :-
हर पंक्ति में सही विकल्प पर टिक करें।
1. प्रिंसिपल साहेब/ सर जी/ महोदय/ मान्यवर सर
2. आपको सूचित करना/ अनुरोध/ मांग/ कहना है कि
3. मेरे पेट में बहुत दर्द/ चोट/ घाव/ सिहरन है
4. अत:/ इसलिए/ इस वजह से/ इस कारण
5. मैं आज/ कल/ परसों/ कभी नहीं
6. विद्यालय आने में/ जाने में/ पहुंचने में/ लौटने में
7. असमर्थ/ असंभव/ उदासीन/ मजबूर हूं
8. कृपा करके/ मजबूरन/ बेमन से
9. आकस्मिक/ चिकित्सकीय/ जबरन अवकाश
10. देकर कृतार्थ/ अनुगृहीत/ एहसान करें
इस बार परीक्षा के बाद सारे परीक्षार्थी धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि चौथी पंक्ति में चारों विकल्प सही माने जाने चाहिए। बात लालाजी तक पहुंची, तो छात्रों की मांग गंभीरता और सहानुभूति से विचार के बाद मान ली गई। लेकिन दोबारा जांचने पर दसों छात्रों को शत-प्रतिशत अंक मिले। इस नई समस्या का समाधान विभाग ने यह दिया कि अंतिम फैसला लॉटरी से हो। यही करना भी पड़ा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: test game