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आओ एक दूसरे को भूत बनाएं

कभी वह जमाना रहा होगा, जब बस, टे्रन, तांगा या बैलगाड़ी वगैरह नहीं होंगे। तब का बंदा पैदल ही चलता होगा। फिर उसके रास्ते में पीपल का पेड़ आया होगा। पेड़ का भूत उस बंदे पर सवार हो गया होगा। बस इसी बात पर बंदे की ईगो हर्ट हो गई होगी। ये भूत का बच्चा मुझे सवारी बनाकर मजा ले रहा है। ठीक है कि मैं पैदल हूं, लेकिन दिमाग से पैदल थोड़ी न हूं। तभी उसके अंदर का वैज्ञानिक जागा और उसने साइकिल, बैलगाड़ी, मोटरसाइकिल तरह-तरह की सवारी बना डाली। लेकिन बदला यहां पूरा नहीं हुआ, फिर बंदे ने उसे श्राप दिया कि आज से भूत पीपल पर नहीं, हर वाहन में निवास करेगा। जब मेरे बच्चे भूत की सवारी करेंगे, तब जाकर होगा बदला पूरा।
आज ट्रैफिक देखो, तो यह कहानी नहीं सच्चाई लगेगी। बंदा गलत नहीं होता, गलती वाहन के अंदर के भूत की होती है। सड़क पर लहराती-बलखाती मोटरसाइकिल में जरूर किसी नागिन डांस प्रेमी का भूत होगा। बाइक पर बैठने वाला यदि गल्र्स स्कूल के आस-पास न घूमे, स्कूटी के पीछे बिना वजह हॉर्न न बजाए, तो फिर ऐसा लगता है, जैसे बाइक का भूत बंदे को बीच सड़क उठाकर पटक देगा। दस का सिक्का न लेने के लिए जो ऑटो वाले  से झगड़ता है, वही एयरपोर्ट पर चार नंबर गेट भी ‘एक्सक्यूज मी’ बोलने के बाद पूछे, तो यह समझ लेना चाहिए कि वह ऑटो के भूत से एरोप्लेन के भूत की सवारी करने की प्रक्रिया में है।  
सड़क पर ट्रक वालों का रुतबा देखकर लगता है कि  ट्रक का भूत तो बदमाशों के पूरे गैंगवार के बाद ही बना होगा। कुछ लोग हर जगह अपनी नाक घुसाने में पारंगत होते हैं, यही बाद में ऑटो रिक्शा भूत बनते हैं। हाई क्लास कारों में निश्चित ही शराबियों का भूत निवास करता है, सुबह कतई फॉर्मल दिखने वाली कार का भूत रात को प्लेटफॉर्म पर चढ़ा या नाले में उतरा मिलता है। कुछ न मिले, तो लोग किसी के भी कंधे पर सवारी करने को तैयार हैं, आओ एक-दूसरे को भूत बनाएं।
    

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  • Web Title:nashtar hindustan column on 5 june