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कड़वा-कड़वा गप्प, मीठा-मीठा थू

डायबिटीज के खौफ ने मीठे की लुटिया डुबो दी है। मीठा ऑफर कर दो, तो बंदा ऐसे देखता है, जैसे मिठाई को उसकी जान लेने की सुपारी दे दी हो। यही माहौल रहा, तो वह दिन दूर नहीं, जब वेलकम ड्रिंक में करेले का जूस ऑफर हुआ करेगा। मीठे बोल कान में पड़ जाएं, तो बंदे का अंतज्र्ञान चीखने लगता है, संभल जा, मीठी छुरी है यह। मीठे बोल सुन मन में बुरे-बुरे विचार आने लगते हैं, उधारी मांगने आया होगा, सरकारी महकमे में मेरी जान-पहचान का फायदा उठाने आया होगा, मुझसे यह उगलवाने तो नहीं आया कि मैंने वोट किसको डाला है? 
हाल ही के लोकतांत्रिक उत्सव में ऐसी बातों का बोलबाला रहा, जो 24 कैरेट की कड़वाहट से तैयार हुई हों। कड़वाहट का ऐसा मंचन हुआ कि नीम चढ़ा करेला भी गुलाब जामुन लगने लगे। मिठास वाली बात न तो कोई सुनना चाहता है, न सुनाना। जैसे कड़ा मुकाबला हो कि तेरी कड़वाहट मेरी कड़वाहट से कड़वी कितनी? हो ना हो स्क्रिप्ट राइटर्स को प्यास लगने पर पानी की जगह ब्लैक कॉफी और भूख लगने पर नीम के तेल में तले करेले खिलाए जाते होंगे। इन स्क्रिप्ट राइटर्स पर ट्रंप और किम जोंग उन तक की जीभ लपलपा रही है। 
कड़वे बोल सुनते ही कुछ लोगों को लगता है कि सत्य साक्षात अवतरित हो गया है, शायद उन्होंने कभी करेले, नीम और रिश्तों की कड़वाहट महसूस नहीं की, इसलिए आज भी सत्य को ही कड़वा मानते हैं। सब बोल रहे हैं कि भाषा का स्तर गिर गया है, लेकिन टीवी के सामने ऐसे जमे बैठे हैं, जैसे कानों में कड़वे बोल डालकर अपनी डायबिटीज का इलाज कर रहे हों। 
इन्हें लगता है, पहले लोग नीम की दातून इसीलिए करते होंगे कि उनकी जुबान में कड़वाहट की कोई कमी न रहे। अब कोई मीठे वादों में नहीं फंसता। मीठे वादों को बंदा दूर से बोलता है, मीठे सेहत के लिए तू तो हानिकारक है। कहावत भी अब पलटकर कुछ इस तरह हो गई है, कड़वा-कड़वा गप्प, मीठा-मीठा थू।
    

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  • Web Title:Nashtar Hindustan Column on 22 may