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गरमी में चुनाव और हॉट-कूल स्टेटमेंट

 

 

गरमियों के मौसम में सूरज धरती पर हमेशा सुइयां बरसाता है। इस बार चुनाव ऋतु में प्रीपेड-पोस्ट पेड व ऑनरेरी किस्म के समर्थकों को यह गरमाहट जरा अजीब लग रही है। वे इसके खिलाफ बयान-दर-बयान दे रहे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं, जो परिवर्तित हालात को कतई सहन नहीं कर पा रहे। वे गरमी का सारा दोष सरकारी जांच एजेंसियों के सिर मढ़ने में लगे हैं। पर एक तबका ऐसा भी है, जो वर्तमान हालात को खूब इंजॉय करता हुआ ‘कूल-कूल’ किस्म के बयान दे रहा है। सब जानते  हैं कि जिनके पास इन्वर्टर या जेनरेटर जैसे उपकरण और वैचारिक धमा-चौकड़ी के लिए अनलिमिटेड जीबी डाटा है, वे तटस्थ भाव को सहज उपलब्ध हो जाते हैं।
सबको पता है कि गरमी का प्रणेता सूरज अपराजेय है। लेकिन सच यह भी है कि जिसे हराया नहीं जा सकता, उसे बडे़ मजे से नजरंदाज किया जा सकता है। यह सच है कि गरमी को  समूल मिटा पाना संभव नहीं, अलबत्ता कोल्ड ड्रिंक से गला तर करके उसका लुत्फ लिया जा सकता है। गरमी से बचने के लिए छाते से लेकर शिकंजी और शीतल जल से लेकर महंगे सनस्क्रीन लोशन तक अनेकानेक उपाय खुदरा बाजार में उपलब्ध हैं। देखने वाले देख पा रहे हैं कि इस हॉट-हॉट मौके पर दुप्पट्टे से अपने चेहरे को ढककर महिलाएं बड़ी खूबसूरती से गरमी के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। उनका मुंह छिपा लेना कायरता नहीं, पॉलिटिकली कैरेक्ट फैशन स्टेटमेंट है। 
तीखी धूप से आहत लोगों की निगाह में बिजली का कैरेक्टर संदिग्ध है, जो न दिन देखती है और न रात, कभी भी फरार हो लेती है। बिजली के इस स्वछंद व्यवहार से खफा नैतिकतावादी जनता त्राहिमाम कर रही है। पर इससे क्या? जनता को वैसे भी इसके सिवा आता ही क्या है?
मौसम के तीखे तेवर से तिलमिला रहे लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है कि इसी माह चुनाव परिणाम आएंगे, तो उसके पीछे-पीछे केरल में मानसून सही समय पर पहुंचने की विज्ञान सम्मत अफवाह भी आ जाएगी।
  
 

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  • Web Title:Nashtar Hindustan Column on 14 may