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कैमरों की चमकती चंचल चाहतें

अपने यहां आजकल जो भी होता है, कैमरे के सामने ही होता है। इसकी एक चमक के आगे दुनिया की हर चमक-दमक फीकी है। कैमरा नहीं, तो शादी-ब्याह तक में भी किसी की कमर न लचके। वह तो यह कैमरा ही है, जिसके आते ही तमाम बाराती नागिन हो जाते हैं और उनकी रूमाल से अपने आप ही बीन की धुनें निकलने लग जाती हैं। सोचता हूं, कहीं कल जंगल में मोर भी यह कहकर नाचने से इनकार न कर दें कि इधर कैमरे तो हैं ही नहीं। जब कोई फिल्म ही नहीं बना रहा, तो फिर जंगल में ऐसे नाच का आखिर फायदा भी क्या? 
धरना, प्रदर्शन, अनशन, घेराव, रैली, भाषण, चुनाव, सबको कैमरे चाहिए। वह भी ऐसे-वैसे नहीं, समाचार चैनलों वाले। एक नहीं, अनेक। हर कोण से कवरेज जरूरी है। जिस काम को दुनिया न देखे, वह काम भी किस काम का? जिन्हें इन कैमरों से ज्यादा लगाव होता है, ऐसे साहसी लोग गुप्त कैमरों से भी भय नहीं खाते। यह जानते हुए कि जमाना स्टिंग ऑपरेशन का है और कभी भी धरे जा सकते हैं, वे तब भी अपना असली काम कर ही डालते हैं। 
‘आप कैमरे की नजर में हैं’। मैं जहां कहीं पर भी यह बोर्ड लगा देखता हूं, मुझे हंसी आने लगती है। ऐसे बोर्ड चोर को पकड़ने के लिए लगाए गए होते हैं कि उन्हें सहयोग करने के लिए कि यहां हरकत की, तो तू पकड़ा जा सकता है। जा, बिना कैमरे वाली जगह तलाश। मैं सोचता हूं, यदि चोर भी सीसीटीवी कैमरों से भयग्रस्त होकर अपना चौर्य-कर्म त्याग चुके होते, तो हम आए दिन चोरी की वारदात की खबरें पढ़ने, सुनने और देखने को तरस जाते। क्या पता, कैमरा उन्हें नया उत्साह देता हो। 
अब तो कैमरों को प्रोफेशनल फोटोग्राफरों की दरकार भी नहीं रही। सभी के हाथों में मोबाइल कैमरे हैं और सेल्फियों की चमकती हुई चंचल चाहतें। इसके एकनेत्री स्वरूप पर आज पूरा विश्व मोहित है। तभी तो, युद्ध हो या शांति, लोग अपनी आंखों से अधिक इन कैमरों की दिखलाई हुई चीजों पर विश्वास करने लगे हैं।

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  • Web Title:Nashtar Hindustan Column on 11 june