DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हम तो पहले ही जानते थे 

चावल की तरह इंसानी स्वभाव की अनेक किस्में होती हैं। हंसमुख होना, हमेशा नॉर्मल से अधिक मुंह लटकाए रखना या बात-बेबात उत्तेजित हो जाना तो नॉर्मल वेरायटी है। इनसे इतर कुछ अतिरिक्त मेधा वाली सेल्फ मेड ‘तथागत’ शक्तियां भी होती हैं, जिन्हें भविष्य की घटनाओं का इलहाम होता है, जिसे वह ‘हमें तो पहले से ही पता था...’ सरीखे शास्त्रीय वाक्य से सार्वजनिक करते हैं। मसलन, ऐसी विभूतियां जो कभी स्वयं सशंकित थीं और घूम-घूमकर पूछा करती थीं कि क्यों साहब, क्या कांग्रेस वापस आ जाएगी, आज वही कहती फिर रही हैं कि हमें तो पहले से पता था कि अमेठी की सीट राहुल के लिए ‘स्मृति’ हो जाएगी और चुनाव के बाद वह अध्यक्ष पद त्याग देंगे।
महानुभाव से यदि पहले पूछा गया होगा कि बुआ-भतीजे का गठबंधन और दलों को डैमेज करेगा, तो पतले सुर में उन्होंने यही कहा था कि कुछ कहा नहीं जा सकता। टीवी प्रवक्ताओं की तरह पल्टी मार अब वह यही कहते नजर आ रहे हैं, हमें तो पहले ही पता था कि गठबंधन नहीं चलने वाला। इन दिनों हम तो पहले से ही जानते थे कहने वालों की बाढ़ आई हुई है। इसके बरक्स ऊंट किस करवट बैठेगा पूछने पर अधिकांश यह कहकर पल्ला झाड लेते हैं कि भइये, मैं इन चक्करों में पड़ता ही नहीं, जबकि विपरीत किस्म वाले जातक ऊंट के बैठते ही चिल्लाने लगते हैं, हमें तो पहले ही पता था कि ऊंट इसी करवट बैठेगा।
क्रिकेट में गति न होने के बावजूद उनको पता रहता है कि रोहित सेंचुरी मारेगा या विराट। बैटिंग के दौरान वह अलक्षित रहते हैं और इनिंग खत्म होते ही प्रकट होकर ताल ठोक कहते सुनाई पड़ते हैं कि हम तो पहले से जानते थे कि आज शर्तिया रिकॉर्ड टूटेगा। क्रिकेट का विश्व कप चल रहा है आजकल। फिलवक्त और खासकर किसी भी मैच से पहले अदृश्य रहती हैं हमें पहले से ही पता था का उद्घोष करने वाली आत्माएं। लेकिन विश्व-कप विजेता का डंका बजते ही वे प्रगट होकर कहती दिखेंगी कि हमें तो पहले ही मालूम था कि यही टीम वल्र्ड कप ले जाएगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Nashtar Hindustan Column on 10 july