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सारी समस्याओं की पाइपलाइन

कभी-कभी ऐसी जगह से कोई ज्ञान की किरण मिल जाती है, जहां से बिल्कुल भी उम्मीद नहीं होती। कौन कह सकता है कि संसद में हुई बहस में कोई अनमोल ज्ञान का रत्न मिल जाएगा? संसद में एक तो बहस होती ही दुर्लभ है, होती भी है, तो वहां बैठे भाई लोग ही उसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन अभी लोकसभा में रफाल पर बहस के दौरान हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल की आर्थिक स्थिति पर कुछ चर्चा हो गई, जिसमें रक्षा मंत्री ने कहा कि एचएएल की 74 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। और मेरे मस्तिष्क में 
बिजली सी कौंध गई। मैंने मन ही मन कहा- यह है हर समस्या का समाधान।
पाइपलाइन में हैं, इसका मतलब यह है कि है भी और नहीं भी है, जैसे पैसे हैं, लेकिन आपके बैंक में नहीं हैं, बैंक में पैसे हैं, लेकिन वे आपके खाते में नहीं हैं या खाते में हैं, लेकिन एटीएम में नहीं हैं। इन सारी ही स्थितियों को इस तरह बताया जा सकता है कि अभी पाइपलाइन में है।
   एक आदमी सरकार से शिकायत करता है कि उसके घर पानी नहीं आ रहा। सरकार कहती है- पानी बस आ ही चुका है, पाइपलाइन में है। आदमी कहता है- लेकिन पाइपलाइन कहां हैं? सरकार कहती है- वह भी पाइपलाइन में है। अब सरकारी नजरिए से उसे पानी मिल गया है, भले ही वह उसे नहीं मिला। 
पाइपलाइन प्राचीन युग में नहीं थी, इसलिए भगीरथ स्वर्ग से गंगा धरती पर ले आए। आज का दौर होता, तो कहा जाता कि गंगा अभी पाइपलाइन में है। आज की सरकारें चलती ही पाइपलाइन से हैं। सरकारें अखबारों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और दीगर मंत्रियों के फोटो के साथ बडे़-बडे़ विज्ञापन देती हैं कि उन्होंने क्या-क्या कर डाला। आम आदमी हैरत करता है कि यहां तो कुछ नहीं दिख रहा। कैसे दिखेगा, जब सब कुछ पाइपलाइन में है, यहां तक कि हमारा लोकतंत्र भी, वह है भी और नहीं भी है। 
    

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  • Web Title:Nashtar Hindustan Column on 10 january