DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बहुत कठिन है डगर पनघट की

अफवाहों का यह दौर तो 23 मई को खत्म होगा, जब सारी अफवाहें खबर बन जाएंगी। इन दिनों तो आप बिना खबरों के अखबार पढ़ रहे हैं। चुनावी ज्योतिषियों का क्या? हद है, अभी सातों भांवरें पड़ीं नहीं कि फैमिली प्लानिंग शुरू। अभी तो हुजूर शपथ ग्रहण कि लिए नई शेरवानियां सिलवाई जा रही हैं। नए पाजामों में नाडे़ डाले जा रहे हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं, जो अभी से शपथ रट रहे हैं। बारातें सज गई हैं, बस दूल्हों की दरकार है। 
चुनावी युधिष्ठिर चाहे रोज झूठ बोलें, उनके पांव कभी जमीन पर नहीं पड़ते। नेता लोग तो यूं भी पराए धन होते हैं, फिर इस काले धन की सफेदी किसने देखी? काठ की तोपें तक गरज रही हैं। इस समय जो माहौल है, उसमें अगर आप ऊंचा सुनते हैं, तो वाकई मजे में हैं। मकई से पॉपकॉर्न कैसे बनता है, इसे जानना है तो कभी गरम तवे पर बैठकर देखिए तो सही। नेताओं को छोड़िए, हमारे यहां तो मूर्ख और डाकू तक कवि और कलाकार बनते देखे गए हैं। महाभारत जैसी लड़ाई में सिर्फ कौरव-पांडव नहीं गिने जाते, मुर्दों का सिर काटने वालों को भी बहादुरी का पदक मिलना निश्चित किया जा रहा है।
आप सब जानते ही हैं कि पहले जनता ही सरकार चुनती थी। मगर जिस तरह गाली-गलौज का माहौल गनगना रहा है, उससे लगता है कि इस बार सरकार जनता को चुनेगी। क्यों न हो? हमारे यहां तो ऐसे टीचर भी हैं, जिनकी अपनी अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है, फिर भी इकोनॉमिक्स पढ़ाते हैं। बच्चे तो टीन की तलवार से भी युद्ध जीत जाते हैं। इधर कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जिसका टेंपो हाई है, वही बड़ा हरजाई है। 
यूं तो ज्यादा सवारी भरने पर चालान हो ही जाता है, लेकिन यह नियम किसी भी तरह के राजनीतिक दलों पर लागू नहीं होता। खैर, भैंसों की लड़ाई में घास का पिसना तो लाजिमी है। छत्र विहीन निर्दलीयों की यह वेदना इधर कितनी सटीक है कि बहुत कठिन है डगर पनघट की, कैसे भर लाऊं  मैं जमुना से मटकी।
    

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Nashtar Hindustan Column 20 april