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आसान पैसा और मुश्किल मेहनत

रेट-कट, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद यह शब्द मार मचाए हुए है। रेट-कट सुनकर मुझे जेब-कट जैसा कुछ याद आता है। रिजर्व बैंक की आसान मुद्रा नीति के बारे में सुना, तो मुझे भ्रम हो गया कि अब रकम आसानी से मिला करेगी। पर ऐसा हुआ नहीं। आसान मुद्रा नीति से रिजर्व बैंक का क्या आशय है, यह समझने की जरूरत नहीं है, बस इतना समझना काफी है कि नीरव मोदी और विजय माल्या के लिए हमेशा ही मुद्रा नीति आसान रही है। रकम आसानी से बटोरो और कट लो, रेट कट की प्रतीक्षा करने की जरूरत ही नहीं। आम आदमी के लिए हमेशा मुश्किल मुद्रा नीति रही है। बॉस से सैलरी बढ़ोतरी मांगो, तो वह बता सकता है कि बेरोजगारी-दर में इजाफा हो रहा है, आपके पास रोजगार तो है। आप सैलरी बढ़ोतरी के लिए परेशान होना पसंद करेंगे या रोजगार के लिए?

आसान मुद्रा नीति रहजनों के लिए भी होती है- चक्कू दिखाकर किसी की भी जेब से आसानी से मुद्रा निकलवाई जा सकती है। पुरुषार्थ पर भरोसा करने वाले अपने कर्मों पर भरोसा करते हैं।  

मौद्रिक नीति के बाद एक्सपर्ट बताते हैं कि आपकी बाइक या मकान के कर्ज की मासिक किस्त कम हो सकती है। ईएमआई में 12 रुपये की कमी हो सकती है पूरे साल के हिसाब से। इस बची हुई रकम का क्या करें जी? अमिताभ बच्चन साहब बता रहे हैं कि वह वाला महंगा सा मोबाइल खरीद लाइए, ईएमआई पर मिल रहा है। ईएमआई से 12 रुपये बचाइए, बच्चन साहब फिर ईएमआई में लगवा देंगे। रेट कट से ईएमआई में 12 रुपये बचते हैं, जो 5,000 की अगली ईएमआई में लगाए जा सकते हैं और 4,788 की जेब नई तरह से कटाई जा सकती है।

पर कुछ ऐसा जुगाड़ नहीं हो सकता कि ईएमआई की चिंता हर महीने करनी ही न पड़े? जी, उसका पक्का जुगाड़ है, पर उसके लिए आपको आसान मुद्रा नीति के हकदारों की श्रेणी में आना पड़ेगा। कैसे आएं?

यह तो विजय माल्या और नीरव मोदी बताएंगे।

 

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  • Web Title:Nashtar Hindustan Column 12 june