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जन-कल्याण के कद्दू का जायका

सरकार से मुझे वैसे कोई खास दिक्कत नहीं है, जैसे मुझे कद्दू से नहीं है। कद्दू मुझे कोई खास पसंद नहीं है, लेकिन मैं उसकी सब्जी खा लेता हूं। लेकिन जैसे कोई कद्दू का भक्त हो जाए और मुझसे कहे कि मुझे कद्दू  को पसंद करना ही होगा और अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा, तो मुझे देश विरोधी माना जाएगा, तब यह बड़ी दिक्कत होगी। खैर, यह अलग मामला है, मैं दूसरे मुद्दे पर बात करना चाहता हूं।

जब भी सरकार मुझ जैसे आम आदमी के कल्याण की बात करती है, तो मेरा दिल बैठने लगता है। तब ऐसा लगता है कि पता नहीं, अब अपना क्या होगा? जैसे इन दिनों पेट्रोल-डीजल के दाम ऐसे बढ़ रहे हैं कि लगता है, आने वाले दिनों में दो बूंद जिंदगी की वाले पोलियो वैक्सीन की तरह पेट्रोल भी गाड़ी में दो बूंद ही डलवाने की नौबत आने वाली है। लेकिन सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम इसलिए ज्यादा हैं, क्योंकि इनसे सरकार को जो पैसा मिलता है, वह जन-कल्याण योजनाओं में खर्च होता है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर पेट्रोल-डीजल के दाम कम किए गए, तो जन-कल्याण के कामों में खर्च होने वाले पैसे में कटौती हो जाएगी। वैसे मेरे यानी जन के कल्याण के लिए सरकार क्या काम करती है, यह तो मुझे सैकड़ों सरकारी विज्ञापन देखने से भी पता नहीं चलता, लेकिन तेल के दाम जब देने पड़ते हैं, तब तो मुझे सीधे-सीधे पता चलता है। 

एक बार जब सरकार को जन-कल्याण की सूझी, तो उसने हर काम में आधार नंबर अनिवार्य कर दिया। फिर सारा देश, बूढ़े, बच्चे, जवान आधार बनाने और उन्हें जुड़वाने की भाग-दौड़ में ऐसे व्यस्त हुए कि अब तक दम नहीं ले पाए हैं। इसी तरह, नोटबंदी भी ऐसे ही हमारे कल्याण के लिए हुई थी। इसलिए सरकार से विनम्र निवेदन है कि आपसे हमें कोई दिक्कत नहीं है, बस हमारे कल्याण की कोई योजना मत बनाएं। 

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  • Web Title:Nashtar Column in daily Hindustan on 31 May