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देखे गए सपने, दिखाए गए सपने

क्या आपने विज्ञापन देखा है आपकी ड्रीम कार, आपके सपनों का घर आदि का? विज्ञापन वालों को कैसे पता चला कि आपने कौन सी कार या कौन सा घर सपने में देखा? यदि सपने चोरी हो रहे हैं, तो यह फेसबुक डाटा के चोरी होने से ज्यादा खतरनाक है। आम बंदे को तो अपने सपने ही याद नहीं रहते। सुबह सपनों से बाहर आते ही बंदा समय के पीछे भागता है। समय उसके जगने से पहले ही दरवाजा खोलकर खड़ा होता है कि उठ, भाग मेरे पीछे, वरना हाथ से निकल जाऊंगा। सपनों को तौलिए की तरह बिस्तर पर पटक वह समय के पीछे भागता है। 

विज्ञापन कंपनियों को पता होता है कि आम बंदे को सपने देखने ही नहीं आते। विज्ञापन बताते हैं कि सपने कैसे देखे जाते हैं, वह भी ऐसी खुली आंखों से, जो बाद में खुली की खुली रह जाएं। बिल्ली की जिंदगी चूहों के सपने देखने में कट जाती है। बंदे की हालत भी बिल्ली जैसी हो जाए, और उसकी जिंदगी भी रोटी के सपने देखने में कट जाए। लेकिन तभी आम बंदे की जिंदगी में विज्ञापन आता है, और बताता है कि रोटी नहीं, सपने में फाइव स्टार होटल का कैंडल लाइट डिनर देख; घर नहीं, क्लब हाउस, मॉड्यूलर किचन, म्यूजिकल लिफ्ट वाला फ्लैट देख। विज्ञापन कम्पनियां न होतीं, तो आम बंदा कभी सपने में भी यह नहीं सोच सकता था कि उसके सपने इतने रंगीन भी हो सकते हैं।

सपने सब देखते हैं, यह एक वहम है। सपने देखे नहीं, दिखाए जाते हैं। बंदा आज बडे़ सपने देखेगा, तभी उसके बडे़ होने की संभावनाओं को पंख लगेंगे। यही पंख उसे जमीनी हकीकत से दूर ले जाएंगे। एक बार सपनों को पंख लग जाएं, तो आंखें कभी नहीं खुलतीं, खुलें भी, तो आम बंदा उन्हें खुलने नहीं देगा। खुद अपने सपने को अपनी आंखों के सामने बिखरते हुए कैसे देखे? अब तो विज्ञापन की महानता राजनीति ने भी स्वीकार कर ली है, न जाने वोटर कब स्वीकारेगा? 

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  • Web Title:Nashtar Column in daily Hindustan on 28 august