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इतिहास की बढ़ती उम्र और गायब होते साल

इतिहास से करीब एक हजार साल डिलीट किए जा रहे हैं। स्कूली बच्चों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि उन्हें इतने साल का इतिहास नहीं पढ़ना पड़ेगा। लेकिन उनके लिए दिक्कत की बात यह है कि इतिहास को पीछे, बहुत पीछे तक खींच दिया गया है। यानी जो इतिहास करीब चार-पांच हजार साल पहले शुरू होता था, उसे और पीछे ले जाने की कवायद चल रही है। पीछे भी कुछ एक हजार साल नहीं, लाखों-करोड़ों साल तक ले जाने की कोशिश है। कहा जाता है पीछे जाने वाले इतिहासकारों को कुछ डायनासोर मिल गए और उन्होंने खुद को उन इतिहासकारों का पूर्वज बता दिया। कुछ इतिहासकार इतने भावुक हो गए कि उन्होंने डायनासोरों के पांव छूकर आशीर्वाद मांगा। डायनासोरों ने उन्हें ‘जुग-जुग जियो’ कहा। इतिहासकारों ने उनसे कहा कि वे यही कोशिश कर रहे हैं यानी जुग-जुग जीने की, लेकिन वे भविष्य के नहीं, अतीत के युगों में जीना चाहते हैं, और अपने साथ सारे देश को वहीं ले जाना चाहते हैं। इतिहासकारों ने यह भी पूछा कि जब वे जुग-जुग जीने का आशीर्वाद दे रहे हैं, तो खुद क्यों विलुप्त हो गए?

इस पर डायनासोर भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि एक दुष्ट आदमी हुआ था, जिसका नाम चाल्र्स डार्विन था। उसने सिर्फ अपना नाम बनाने की खातिर डायनासोरों को विलुप्त कर दिया था। इतिहासकारों ने कहा, हम शपथ लेते हैं कि हम डार्विन को विलुप्त कर देंगे। फिर उन्होंने कहा कि ऐसे ही भारत में भी एक आदमी था, जिसका नाम जवाहरलाल नेहरू था, वह भी भारतीय संस्कृति में डायनासोरों के वंशजों को विलुप्त कर देना चाहता था, लेकिन हमने उसे ही विलुप्त करने का संकल्प लिया है। हमें आशीर्वाद दीजिए।

यहां तक का प्रसंग एक महाभारतकालीन ब्लॉगर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है। उसने यह भी लिखा है कि अभी तक वे इतिहासकार वहीं हैं और वह वक्त-वक्त पर उनके बारे में खबरें साइबर सेल को देते रहते हैं। 

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  • Web Title:Nashtar Column in daily Hindustan on 06 September