अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

डाकघर चला बैंक की चाल

अखिल भारतीय चरित्र इस मुल्क में सिर्फ दो का है। एक अमिताभ बच्चन का, जो देश के कोने-कोने में भारत की लगभग हर भाषा में बताते हैं कि अपना सोना गिरवी रखकर उस गोल्ड लोन कंपनी से लोन लाएं। और दूसरा, भारतीय डाकखाने का है। लगभग हर इलाके में, जहां अमिताभ बच्चन अपनी किसी पसंदीदा ब्यूटी क्रीम, गोल्ड, गोल्ड लोन, गुजरात टूरिज्म, हेयर ऑइल, बैंक आदि के बारे में बता रहे होते हैं, वहीं भारतीय डाकखाना भी मिल जाता है। 

तमाम बैंकों से ज्यादा पहुंच रखने वाले भारतीय डाकखाने में बैंक बन गया है। भारतीय डाकखाना उन लोगों के लिए बहुत शानदार जगह है, जो अतीत में रहना पसंद करते हैं। मुझे जब भी 1850 का फील लेना होता है, डाकखाने चला जाता हूं। बहुत स्लोमोशन में है वहां सब कुछ। मेरे लिए स्पीड पोस्ट के जरिए राजमहेंद्री (आंध्र प्रदेश) से भेजा गया एक पैकेट छह दिनों बाद गाजियाबाद पहुंचा। खैर, अगला पैकेट मैंने एक निजी कूरियर से मंगवाया। वह उसी ठिकाने से आठ दिन में पहुंचा। मैं दार्शनिक हो गया- क्या सरकारी क्या निजी, सबमें समभाव के दर्शन हो गए। 

डाक बैंक नाम सुनते ही सीन उपस्थित हो गया है कि दूरदराज के छोटे-छोटे गांवों में भी बैंक पहुंच गया। नीरव मोदी शहर में थे, शहर में बैंक थे, तो नीरव मोदी को मौके थे कि माल साफ कर देते। अब तो हर गांव में माल साफ योजना का जुगाड़ हो सकता है। सबको लूट की छूट योजना की घोषणा करने में आसानी होगी सरकार को। सबसे अच्छी बात यह है कि डाक बैंक बार-बार फोन करके यह न कहेंगे कि लोन ले ले। डाकखाने अपने आइटम किसी को देने में कोई रुचि नहीं दिखाते। मुझे अपने ही आइटम डाकखाने से लेने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। डाक बैंक से लोन लेने के लिए कोई कॉल नहीं आएगा, इतना भर हो जाए, तो मेरे समेत लाखों लोग डाक बैंक के ग्राहक बन जाएंगे। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Nashtar Column in daily Hindustan on 05 september