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दीपावली पर एक निबंध 

आज दीपावली है। समर्थ लोग किसी की शुभकामनाओं के सहारे नहीं चलते। नीरव मोदी बगैर किसी की शुभकामनाओं के एक बड़े सरकारी बैंक में स्वच्छता अभियान चला गए। दिवाली पर हम सब अपने घर की सफाई करते हैं। नीरव मोदी, मेहुल चौकसी समर्थ-सबल लोग हैं, बैंक भी साफ कर गए, वह भी दिवाली से पहले। यानी धनार्जन के लिए दिवाली तक इंतजार नहीं करना चाहिए, दिवाली से बहुत पहले और दिवाली के बहुत बाद तक धनार्जन से जुड़ी गतिविधियों में सन्नद्ध और प्रतिबद्ध रहना चाहिए। इस कहानी से हमें यह भी शिक्षा लेनी चाहिए कि दिवाली पर मिलने वाली शुभकामनाओं के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, जब मौका मिले सामर्थ्य दिखा देना चाहिए। 

दिवाली पर दिल्ली में मास्क लगाकर घूमना चाहिए प्रदूषण की वजह से। वैसे कामयाब लोग बारह महीनों ही चेहरे पर मुखौटे लगाए घूमते हैं। लक्ष्मी जी के लिए आफत है, दिल्ली में बिना मास्क लगाए वह आएं कैसे? दिल्ली में समझदार लोग इतनी तरह के मास्क लगाए घूम रहे हैं कि लक्ष्मी जी पहचानें कैसे कि किस के घर जाना है? इसलिए लगता है कि वह दिल्ली की तरफ आना नहीं चाहतीं। अभी आंकड़ा आया है कि देश की अर्थव्यवस्था की जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत सिर्फ 831 लोगों के पास है। इनमें से अधिकांश मुंबई में रहते हैं, दिल्ली में नहीं। लक्ष्मी जी लगता है प्रदूषण की वजह से ही दिल्ली नहीं आतीं। 

दिल्ली पुलिस ने इश्तिहार देकर बताया है कि वही पटाखे चलाए जाएं, जिनमें 125 डीबी (एआई) या 145 डीबी (सी) पीके (चार मीटर दूर से छोड़ने पर) की आवाज आए। मैंने अपने इंस्पेक्टर दोस्त से पूछा -इसका मतलब क्या है? कैसे पता करें कि कौन से पटाखे 125 डीबी (एआई) या 145 डीबी (सी) पीके वाली अहर्ता है? उसने कहा, उसे भी नहीं मालूम। मैंने कहा- बिना जाने बताना तो टीवी एंकरों और एक्सपर्ट को शोभा देता है। तुम भी टीवी एंकर बनने के लिए क्वालिफाई कर जाओगे।

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  • Web Title:nashar hindustan column on 7th november