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आने वाले दिनों का रोजनामचा

आज के जमाने में जिन शहरों में कफ्र्यू नहीं लगता, वहां का ट्रैफिक अनियंत्रित रहता है और हर दस कदम पर जाम के दर्शन हो जाते हैं। कफ्र्यू लगा रहे, तो परिंदे भी यातायात के नियमों का पालन करने लगते हैं। इन दिनों वैसे भी अपराध के लिए खेद व्यक्त नहीं किया जाता, चालान कटवा दिया जाता है। राजनीति में तो अपराध अब इतनी होशियारी से किया जाता है कि करने वाला खुद बच जाए और नाम दूसरे का लगे। बाकी तो जो होगा, देखा जाएगा। वैसे भी हमारे यहां जिसका मुकदमा पीढ़ी-दर-पीढ़ी न चले, वह बड़ा आदमी नहीं होता। 

सयानों ने कभी समझाया था कि चोर चोरी करके अगर थाने में घुस जाए, तो पकड़ा नहीं जाता। वहां का डॉग-स्क्वाड अपने स्टाफ को नहीं सूंघता। सड़क छाप कुत्ते तो पिटने पर विलाप करने लगते हैं। पाकिस्तान के क्या कहने। वहां कुत्ते क्या, आदमियों तक की पूंछ सीधी होती है। वे भौंकते नहीं, बयान देते हैं। जो लोग परमाणु बम के हमले की धमकी दे रहे हैं, उन्हें यही नहीं पता कि उनकी भीग चुकी माचिसों में तीलियां ही नहीं हैं। चाहें, तो वे अपना माथा रगड़ें। वैसे बात भी सही है, किसी भी अंधेर नगरी में चौपट राजा ही शोभा देता है। भरोसेमंद लोग तो सरकारी बजट में भी सेंध मार लेते हैं। 

मन में धैर्य धरना होता है, क्योंकि अकेले किए गए पाप से ग्लानि होती है। सामूहिक पाप करने से जिम्मेदारी और माल, दोनों बंट जाते हैं। सजा भी मामूली होती है। चौकीदार को भरोसे में ले लो, तो चोरी में बरकत भी होती है और मनोबल बना रहता है। सही तो यह भी है कि पुलिस वाले को आप लाख मामाजी-मामाजी कहते रहो, वह बगैर डंडे मारे आपको अपना भांजा नहीं मानता। गजब तो यह है कि मां को यह पता ही नहीं होता कि उसका भाई पुलिस में है। खैर, रामलीला के गोदामों से धनुष-बाण निकाले जा रहे हैं। पूजा की तैयारी हो रही है। राक्षसी भैंसे को अच्छी डाइट खिलाई जा रही है और रावण के कंधे पर दस सिर लगाए जा रहे हैं। 

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  • Web Title:hindustan nashter column on 07 September