Hindustan Nashtar Column on 23 January - फ्लैट-फ्लैट में भी फर्क होता है साहब DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फ्लैट-फ्लैट में भी फर्क होता है साहब

अजीब स्थिति है साहब, जो डीडीए यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण घर देना चाहता है, देने को उत्सुक है, दे रहा है, उसका घर किसी को चाहिए नहीं, और जो फ्रॉड कर रहा है, पैसे लेकर भी घर देना नहीं चाहता, नहीं दे रहा है, उन बिल्डरों से घर की मांग के लिए मार मची है! अदालत बिल्डरों को फटकार रही है- जिनका पैसा लिया है, उन्हें घर दो, नहीं तो तिहाड़ दूर नहीं है, देख लो। सरकारें बिल्डरों को धमका रही हैं- जल्द से जल्द घर तैयार करो। और हां, घर की चाहत में लुटे-पिटे इन लोगों को उनके घर की चाबी हम सौंपेंगे। जय-जयकार के लिए चाबियां सौंपनी तो पड़ेंगी। डीडीए हांक लगा रहा है- घर ले लो, घर ले लो। पर उसके पास कोई फटकता भी नहीं। 

अद्भुत नजारा है। बेघर हैं, पर डीडीए मकान दे, तो नहीं चाहिए। डीडीए हर साल-छह महीने में एक बार बाजार से हांक लगाता निकलता है- मकान ले लो, मकान ले लो! कोई भूल से ले लेता है, तो तुरंत लौटाने पहुंच जाता है कि यह क्या दे दिया यार तुमने, यह कोई घर है? संभालो अपना, हमें नहीं चाहिए। वैसे मानना पड़ेगा, डीडीए जैसा विक्रेता भी नहीं मिलेगा। पड़ोस के दुकानदार से कोई चीज खरीदो, खराब निकल आए, तो सामान बदलने में वह सौ आना-कानी करेगा। पर डीडीए ऐसा बिल्कुल नहीं करता। अच्छा घर पसंद नहीं आया। कोई बात नहीं, लाओ दे दो वापस। वह फिर हांक लगाने लगता है। अब तो हालत यह हो गई है कि कोई उसके ठेले के पास भी नहीं आता।

डीडीए ऑफर देता है- अच्छा, हम एक के दो बना देते हैं। ले लो। पर लेने वाले दुत्कार देते हैं- नहीं चाहिए यार, क्यों तंग कर रहे हो? हारकर अब डीडीए ने फौज और अद्र्धसैनिक बलों को ऑफर दे दिया है। वैसे भी देशभक्ति का जमाना है। शायद यह नुस्खा काम कर जाए। फौज वाले हमेशा आपदा ग्रस्त लोगों को बचाने पहुंच जाते हैं, तो शायद वे डीडीए को भी बचा लें। शायद वे उसके घर ले लें। आपको तो नहीं चाहिए न। ठीक है-ठीक है यार, हाथ क्यों जोड़ रहे हो? 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Nashtar Column on 23 January