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बाल्टी से कंप्यूटर बाबा तक

लोकसभा चुनावों का बड़ा हिस्सा निकल चुका है, युद्धपोत तक आ चुके हैं समंदर से उठकर। गहरे समुंदर के पानी में चलने वाले पोत अब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर चल रहे हैं चुनावी भाषणों में। यूं पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी नौसेना के युद्धपोत चल सकते हैं चुनावी रैलियों में। चुनावों में कंप्यूटर बाबा आ गए। पुराने लोग याद कर सकते हैं कि पहले बाल्टी बाबा, झक्कड़ बाबा आते थे चुनावों में। बाल्टी सं कंप्यूटर पर आ गए, यह विकास है।

और विकास होगा, तो तरह-तरह के ब्रांडेड बाबा आएंगे- मोबाइल बाबा, टैबलेट बाबा, कंप्यूटर पेंटियम फोर वाले बाबा। वह दिन भी आएगा, जब चुनावी रैलियों में कहा जाएगा कि हम तो एप्पल कंप्यूटर वाले बाबा लाए और हमारे चाइनीज प्रतिद्वंद्वी चाइनीज कंप्यूटर वाले बाबा लाए। बीच में कोई कोरियन कंपनी बाबाई इश्तिहार कर सकती है- हमारे यहां बाबा सही रेट पर मिलते हैं। 

कई मामलों में क्वालिटी के मामले में जनता चिंता मुक्त हो चुकी है। चिंता करके क्या होना है, जो बंदा इस पार्टी के आदर्शों को बताकर वोट मांग रहा है, वह दो महीने पहले इस पार्टी की एंटी पार्टी का विचारक था। कहे-सुने पर क्या एतबार करें, नाच-गाना देखो, मौज करो। विकास का सम्यक स्तर तब दिखेगा, जब सैटेलाइट बाबा, अंतरिक्ष बाबा, चंद्रयान बाबा आएं, यानी नाम सुनते ही एकदम वैज्ञानिक चेतना जागृत हो जाए। पर वैज्ञानिक चेतना आ जाए, तो क्या होगा? जी फिर वैज्ञानिक शत्रुमारण यज्ञ करेंगे। साधु नहीं, बाबा चाहिए। बाबा भी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले।

जनता जागरूक हो जाएगी, तो पूछने लगेगी- ब्रांड बताओ, सिर्फ कंप्यूटर से न टहलाओ। युद्धपोत से लेकर हैंडपंप, कंप्यूटर बाबा और उर्मिला मातोंडकर की आंखमारक फोंटू तक, भारतीय चुनाव प्रचार गंभीर विमर्श की ओर जा रहे हैं या सर्कस हो रहे हैं। चुनाव प्रचार की तुलना सर्कस से की जाए, तो सर्कसवाले इसे अपनी इज्जत अफजाई मानेंगे। सर्कस में इतनी वेराइटी के आइटम नहीं होते, जितने चुनाव प्रचार में दिखते हैं।

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  • Web Title:Hindustan Nashtar Column May 15