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16 जनवरी, 2021|5:12|IST

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यह साल जाएगा, तो बहुरूपिया स्ट्रेन आएगा

साल वैसे तो यह 20-20 है, फिर भी निपटता हुआ-सा लग नहीं रहा। लगभग दो-तिहाई साल तो मुंह पर मास्क बांधते, उसे गले में लटकाते और महामारी के बारे में नए-नए विशेषण सुनते-सुनाते जैसे-तैसे व्यतीत हुआ। सच तो यह है कि यह समय दरअसल स्वत: नहीं गुजरा, कठोर सुपारी की तरह हिकमत के सरौते से बहुत संभल-संभलकर इसे काटना पड़ा। अलबत्ता, हेल्थ कॉन्शस लोगों की जान सदा सांसत में रही। खौफजदा मुल्क के नागरिक वायरसों के बारे में इतने ज्ञानवान हुए कि वे चाहें, तो अपने नाम के आगे वायरस-प्रवीण टाइप मानद उपाधि टांग सकते हैं।
जानकारों से सुनने में आ रहा है कि कोरोना का स्ट्रेन बहुरूपिया बन मार्केट में नई व्यापारिक उम्मीदें लिए लगभग आ समाया है। यह तयशुदा है कि अगला साल इस नए-नवेले वायरस के नाम समर्पित होना है। एक स्वनामधन्य नीम-हकीम जी को दबी जुबान में यह कहते हुए सुना गया है कि नया साल मुनाफे के मामले में वाकई इक्कीस साबित होगा। खबर है, उन्होंने अब सेकेंड हैंड बाइक खरीदने का इरादा ताक पर रख इंटरनेट पर लग्जरी कारों को निरखना-परखना शुरू कर दिया है। एक नामवर कारोबारी ने अपनी पहचान उजागर न किए जाने की शर्त पर बताया है कि बिजनेस में ऐसे मुरादों भरे दिन बार-बार नहीं आते। एक वक्त था, जब स्कूली किताबों का सीजन जोर-शोर से प्रकट होता था। अब दवाओं, मायूसियों और चिंताओं का बाकायदा उत्सव मनता है।
इधर-उधर से वैक्सीन आने की सूचनाएं आ रही हैं। नए साल में वह देर-सवेर आएगी ही। पता लगा है कि पुलिस वालों का टीकाकरण सबसे पहले होगा। इस अपुष्ट सूचना के आते ही विघ्नसंतोषी जीवों ने कहना शुरू कर दिया है- वाह जी, पुलिस वालों को सबसे पहले क्यों? हो न हो, दाल में कुछ तो काला है भइये, देख लेना। कहने वाले सरोकारी कहते घूम रहे हैं कि इस मुद्दे पर चंद खौलते हुए ट्रेंडिंग ट्वीट, एक ठो देशव्यापी आंदोलन और जगह-जगह शांतिपूर्ण धरनों का होना तो बहरहाल बनता ही है। 
 

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  • Web Title:hindustan nashtar column 29 december 2020