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ट्रैफिक हवलदार का पाकिस्तान

कहावत है कि एक पुड़िया में पूरा जहान फूंका जा सकता है। पुड़िया में अगर अच्छी क्वालिटी की भंग हो, तो यह जहान क्या, समूचा ब्रह्मांड फूंका जा सकता है। परमाणु बम पाकिस्तान के नेताओं के हाथ में कुछ-कुछ भंग की पुड़िया टाइप हो गया है। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद बताते हैं कि हमारे पास दो सौ ग्राम का भी है, पांच सौ ग्राम का भी है, एक किलो का भी है। 

नए मोटर व्हीकल ऐक्ट में हाल यह है कि दिल्ली का पुलिस का ट्रैफिक हवलदार भी एकाध साल में पाकिस्तान को खरीदने की हैसियत बना लेगा। ऐसी हैसियत अभी देश की टॉप तीन कंपनियों को मिलाकर है। पाकिस्तान का सकल घरेलू उत्पाद करीब 330 अरब डॉलर बनता है, भारत की तीन शीर्ष कंपनियों- टाटा कंसल्टेंसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक की बाजार कीमत जोड़ लें, तो 330 अरब डॉलर के आसपास ही बैठती है। 

तीन भारतीय कंपनियां पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के बराबर हैं। पाकिस्तान में दो आइटम बहुत होते हैं- एक तो मानव बम और दूसरे गधे। मानव बमों का एक्सपोर्ट लगातार मुश्किल होता जा रहा है। अलबत्ता गधों का एक्सपोर्ट पाकिस्तान कर रहा है चीन को। फरवरी 2019 में चीन ने पाकिस्तान को करीब 43 अरब रुपये का कर्ज दिया, ताकि पाकिस्तान गधों का सम्यक विकास करके उनका निर्यात चीन को कर सके।

पाकिस्तान के 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वहां करीब पचास लाख गधे हैं। गधों के मामले में भी पाकिस्तान तीसरे नंबर पर है। दुनिया में सबसे ज्यादा गधे इथियोपिया में हैं और फिर चीन में। जब से इमरान खान आए हैं, गधों की तादाद में तेज बढ़ोतरी हो रही है। साल भर के भीतर एक लाख गधे पाकिस्तान में बढ़ गए हैं। एक पाकिस्तानी मित्र ने गर्व से कहा- इंडिया बाहर सॉफ्टवेयर इंजीनियर भेज रहा है तो क्या, पाकिस्तानी भी बाहर जा रहे हैं, जैसे पाकिस्तानी गधे। मैंने निवेदन किया- सिर्फ गधों को भेजना कसाब के मुकाबले लाख दर्जा बेहतर है।

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  • Web Title:hindustan column nashtar of 11 september