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सही निर्णय

मैनेजमेंट के क्षेत्र में सही निर्णय लेने की क्षमता बहुत अहमियत रखती है। जो आदमी सही वक्त पर सही निर्णय लेता है, वही अच्छा लीडर या मैनेजर कहलाता है। यह विषय इतना अहम है कि गूगल पर इसके लिए दो करोड़ से भी अधिक लेख और किताबें उपलब्ध हैं। मैनेजमेंट गुरु पीटर ड्रकर और अन्य लेखकों ने निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने पर बहुत जोर दिया है। इसके लिए अनेक विकल्पों में से एक को चुनने की समझ, अज्ञात में छलांग लगाने का साहस, असफल होने का जोखिम उठाने की तैयारी और पूरी टीम को साथ लेकर चलने की कुव्वत जैसे चीजें जरूरी मानी जाती हैं। एक साथ इतने गुण कम लोगों में ही होते हैं, इसलिए अच्छे मैनेजर बहुत कम होते हैं।

इस बारे में ओशो कहते हैं- निर्णय क्या आता है यह महत्वहीन है, महत्वपूर्ण यह है कि यह कहां से आता है। वह मस्तिष्क से आ रहा है, तो दुख पैदा करेगा। मस्तिष्क से किया गया निर्णय डांवांडोल रहता है। ‘डिसीजन’ शब्द का अर्थ है, ‘डि-सीजन’, यह तुम्हें काट देता है। यह अच्छा शब्द नहीं है। यह तुम्हें वास्तविकता से काट देता है। जो मात्र मस्तिष्क से आता है, वह कभी निर्णायक नहीं होता, हमेशा परस्पर-विरोधी होता है। दूसरा विकल्प खुला होता है और विचार चलते रहते हैं, कभी यह-कभी वह। 

यदि कोई निर्णय आपकी समग्रता से आता है, तो आप एक क्षण भी पश्चाताप नहीं करते हैं। वह निर्णय सही होता है, जो जीवन के अनुभव से आता है, उसमें कोई द्वंद्व नहीं होता। आप श्वांस अभी यहीं लेते हैं, आप भविष्य में या भूतकाल में श्वांस नहीं ले सकते। सही निर्णय श्वांस जैसा होता है, सीधा-सरल, उसमें कोई विकल्प नहीं होता।

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