mansa wacha karmana in hindi hindustan news paper on 6th of july 2018 by praveen kumar - बारिश की बूंदें DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बारिश की बूंदें

आषाढ़ की पहली बारिश शुरू होते ही लगता है कि धरती उत्सव मोड में आ गई है। हरीतिमा का आह्वान किया जा चुका है और हवाएं गुलजार का वह नगमा गुनगुना रही हैं- मौसमी पेड़ है, मौसम में उगा करता है, पानी का एक पेड़ है बारिश, जो पहाड़ों पर उगा करता है। बारिश है ही ऐसी। धरती को ही नहीं, मन को भी नहलाती है। चीनी कवि लूशिन अपनी कविता में लिखते हैं- ज्यों-ज्यों धरती हरी होती जाती है, मन होता जाता है शुभ्र, बादल बुहार देते हैं सारे उदास रंग, अन्न कहते हैं मुंह खोल रखोे, आ रहा हूं मैं।

 बूदों सा सर्जक कोई नहीं। इनका टपकना, अन्य बूंदों के साथ मिलकर बहना, धरती में समा जाना या फिर ताल-तलैया, नदियों में बदल जाना, सब कुछ सृजनात्मक है। इनके आने से ही धरती मातृत्व के लिए तैयार होती है। 

बारिश में भले ही आप खुद को कमरे में बंद कर लेते हों, लेकिन वर्षा का संदेश यह कतई नहीं होता। यह आपको एक साहसिक यात्रा के लिए उकसाती है। अज्ञेय लिखते हैं- ये मेघ साहसिक सैलानी, ये तरल वाष्प से लदे हुए, द्रुत सांसों से लालसा भरे, ये ढीठ समीरन के झोंके, अलमस्त चल दिए छलिया से।  अज्ञेय मेघों को एक ऊर्जावान युवा की तरह देखते हैं।

हमें बारिश को छूने की कला आनी चाहिए। बारिश ने अगर आपके हृदय को नहीं छुआ हो, तो आप अभागे समझे जा सकते हैं। कालिदास बूदें बरसा रहे मेघों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहते हैं- जो संतप्त हैं, मेघ तुम उनके रक्षक हो। कहते हैं कि बारिश जब जमकर हो रही हो, हम खुद को ठहरे हुए पाते हैं। यह हमें सोचने को भी उकसाती है। आइए बूंदों को अपने भीतर उतरने दें।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mansa wacha karmana in hindi hindustan news paper on 6th of july 2018 by praveen kumar