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विजय का भाव

चौपड़ के खेल में एक कहावत हमेशा कही जाती है- जरूरी नहीं है कि अच्छे पासे आपके पास हों। बस जो हैं, उनका सही प्रयोग करना आपको आना चाहिए। जीवन के लिए भी यही सत्य है। आप विकट से विकट हालात से उबर सकते हैं, बस आपको अपने बाजुओं और पैरों पर भरोसा और उनका सही प्रयोग करना आना चाहिए। हमारे शास्त्रों में गृत्समद नाम के एक मुनि का जिक्र है। वह बहुमुखी प्रतिभा के थे- कवि, गणितज्ञ, वैज्ञानिक, किसान और बुनकर भी। उन्होंने एक बहुत ही अच्छी पंक्ति लिखी है- प्रायेप्राये जिगीवांस: स्याम।  हर व्यवहार में विजय भाव रखिए। ऐसा हो गया तो सही मायनों में आप चक्रवर्ती हैं। व्यवहार में विजय भाव रखने का मतलब अहं नहीं है, बल्कि यह है कि आप जो कर रहे हैं, वह सर्वोत्तम तरीके से हो रहा है। 

भले ही साधन सीमित हैं, पर आप अपने काम के प्रति समर्पित हैं और उसे पूरे मनोयोग से कर रहे हैं। साधन का रोना अक्सर वही रोते हैं, जो साधनों के प्रति लापरवाह होते हैं। वे किसी चीज को तोड़ने के लिए औजारों का रोना रोते हैं, जबकि उनके आस-पास पत्थर बिखरे होते हैं। वे चाहते हैं कि कुछ बनाएं, पर कहते हैं कि मेरे पास घास-फूस के सिवा कुछ नहीं, जबकि बया चिड़िया इन्हीं के सहारे अपने सपनों का घर बना लेती है। चार्ली चैप्लिन का बचपन घोर गरीबी में बीता। मां पागलखाने में, पिता लापरवाह और सौतेली मां प्रताड़ित करने वाली। पर चार्ली ने विपरीत स्थितियों को औजार बनाया और दुनिया को दिखाया कि इस हाल में भी खुश रहा जा सकता है। वह अल्प साधनों के साथ बेहतर भविष्य का स्वप्न देखते रहे और उसे पूरा भी करते रहे।

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  • Web Title:mansa vacha karmna Hindustan column 14th march