Mansa vacha Karmana Hindustan Column on 11 june - सोच और विज्ञान DA Image

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सोच और विज्ञान

वह विज्ञान के छात्र नहीं रहे, लेकिन उनके नजरिये में वैज्ञानिकता देख लोग उन्हें ‘मैन ऑफ साइंस’ कहकर संबोधित करते हैं। उनका स्वभाव समझौतावादी न होकर तर्कवादी है। कुछ रूढ़िवादी लोग उनके तर्कवादी होने से चिढ़ते हैं। वह किसी की निंदा या प्रशंसा की परवाह नहीं करते। उनका मानना है कि विज्ञान हमें इन प्रवृत्तियों से ऊपर उठाता है। खुद का और समाज का सर्वहित विज्ञान की दृष्टि अपनाने से ही हो सकता है। विज्ञान सभी तरह की वर्जनाओं, रूढ़ियों, अंधविश्वासों और पाखंडों को खत्म करके स्वस्थ दृष्टि अपनाने पर जोर देता है। 
विज्ञानपरक नजरिये को जितनी अहमियत दी जाए, उतनी ही समाज से वर्जनाएं, रूढ़ियां और मान्यताएं समाप्त करने में मदद मिलती है, मगर कई वजहों से ऐसा नहीं हो पा रहा है। महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने कहा था, ‘विज्ञानपरक दृष्टि इंसान को सही रास्ता दिखाने और ज्ञान के लिए प्रेरणा का कार्य करती है।’ दरअसल, शिक्षा व्यक्ति को सही नजरिया रखने का सबसे बड़ा आधार तो है, पर जब व्यक्ति अपनी मान्यताओं, परंपराओं और रूढ़ियों से ऊपर उठकर उसे जीवन के हर क्षेत्र में सही तरह से इस्तेमाल करे, तभी कुछ बात बन सकती है। महज पाठ्यक्रमों को पूरा करके डिग्रियां ले लेने से विज्ञानपरक और तर्कवादी नजरिया नहीं बन सकता। इसलिए कहा जाता है कि बच्चों को प्रारंभ से ही ऐसी शिक्षा दिलाई जाए, जिससे उनमें विज्ञान, तर्क और ज्ञान को ग्रहण करने की लगातार उत्सुकता रहे। एक खुलेपन का माहौल, खुलेपन का स्वभाव बनाने में बच्चों की मदद की जाए। इससे समाज को बेहतरी की तरफ ले जाने में भी सहायता मिलेगी।

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  • Web Title:Mansa vacha Karmana Hindustan Column on 11 june