DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चाहिए एक दोस्त

अपने वार्ड में लेटे हुए वह बेहद उदासी में थे। बीते 15 दिनों से वह बीमारी से जूझ रहे थे, पर इस दौरान इक्का-दुक्का लोगों ने उनकी खबर ली। हालांकि जब फेसबुक और ट्विटर पर होते, तो उनके दोस्तों की लिस्ट सैकड़ों में दिखती थी।

दोस्ती को लेकर हम भ्रम के युग में जी रहे हैं। हम चाहे जितने सोशल हो जाएं, दोस्तों की तादाद इक्का-दुक्का ही होती है। ऐसा भी हो सकता है कि आपके पास कोई दोस्त हो ही नहीं, सारे परिचित हों। महान दार्शनिक शॉपेनहावर ने लिखा है- मेरा सारा जीवन एकाकी और बिना दोस्त के बीता। मैं किसी को अपना नहीं बना सका, लेकिन किसी ने मेरा बनने जैसा कुछ किया भी तो नहीं।’ शॉपेनहावर चाहते थे कि उनके कुछ दोस्त हों, जिनके साथ वे उठें-बैठें, चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान करें, लेकिन उन्हें जीवन के आखिर तक कोई नहीं मिला। हालांकि उन्होंने इस कमी को कुछ हद तक अपने कुत्ते से पूरा किया, जिसे वह प्यार से आत्मा कहते थे। सच्चा मित्र मिलना दुर्लभ हीरे के मिलने जैसा है। दोस्त बनाना केवल आप पर ही निर्भर नहीं करता। यह दोतरफा प्रतिक्रिया का प्रतिफल माना जाता है। यह न तो आपके मनचाहे हो सकता है और न ही एकाएक। सुकरात ने कहा है कि दोस्ती करने में जल्दबाजी नहीं करो, लेकिन करो तो उसे अंत तक निभाओ। दोस्ती को अंत तक निबाहना सबसे बड़ी कसौटी है। ऐसा नहीं है कि शॉपेनहावर ने किसी से दोस्ती नहीं की। उन्होंने कहा भी कि जब भी मैंने किसी में ईमानदारी की झलक देखी, उसकी ओर हाथ बढ़ाया। लेकिन वह बस अपना फायदा देखता रहा और यह बात मुझे खल गई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mansa vacha karmana article of hindustan on 9th november