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सभी प्रश्न अनिवार्य हैं

मनुष्य का पूरा जीवन चाहे-अनचाहे सवालों से घिरा रहता है। भारत की पूरी सोच अधिकतर प्रश्नोत्तर शैली में व्यक्त हुई है। उपनिषद् आदि प्राचीन ऋषियों के ग्रंथ या तो गुरु-शिष्य के प्रश्नोत्तरों पर आधारित हैं या फिर स्वयं ऋषियों ने प्रश्न उठाकर उनका उत्तर दिया है।
भारत में ऋषियों ने कमाल की खोज की है। महर्षि अगस्त्य को वेदों में खनने वाला ‘खनित्र’ कहा गया है। अगस्त्य का मतलब है, जो पहाड़ को काट मार्ग बनाए। अगस्त्य ने विंध्याचल के अहंकार को तोड़कर उसे झुके रहने की आज्ञा दी। एक महान वैदिक ऋषि गृत्समद हुए। उन्होंने कपास की खोज की। धागा बुनने की कला सिखाई। ताने-बाने का ‘तंतु’ शब्द ऋग्वेद  का ही है। ऋषियों ने सिखाया कि मानव जीवन उपेक्षा की वस्तु नहीं है। हमारा हर कदम मुश्किलों से घिरा है। समय हमारी कठोर परीक्षा लेता है। महाभारत में युधिष्ठिर से पूछे गए यक्ष प्रश्न की तरह हमें उचित उत्तर ढूंढ़ना पड़ता है। कहते हैं कि व्याकरण महाभाष्य  के रचनाकार महर्षि पतंजलि जंगल से जा रहे थे, तभी उन्हें किसी वृक्ष पर रहने वाले ब्रह्मराक्षस ने पकड़ लिया। उसने कहा- मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, तो बच सकते हो। पतंजलि ने प्रश्नों के उत्तर दे दिए, तो उस संतुष्ट ब्रह्मराक्षस ने कुछ लिखवाना शुरू किया, वही महाभाष्य  है। इस दंतकथा का निचोड़ है कि महान और अति मानवीय शक्तियों से ही महाभाष्य  जैसा ग्रंथ लिखा जा सकता है।
स्कूल-कॉलेजों में हमें ऐसे प्रश्नपत्र मिलते हैं, जिनमें लिखा होता है कि सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। जीवन का प्रश्न भी छोटा हो या बड़ा, उसे नजरअंदाज नहीं करना है। इनका समाधान ही हमें आगे बढ़ाता है। 
 

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  • Web Title:Mansa vacha karmana article of hindustan on 6 november