DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

छठे बोध का साथ

रूसी कवि रसूल हमजातोव की एक पंक्ति है- जब आंख खुले, तो बिस्तर से ऐसे लपककर मत उठो, मानो तुम्हें किसी ने डंक मार दिया हो, तुमने जो सपने में देखा है, पहले उस पर विचार कर लो।  यानी बाहरी आपाधापी को परे हटाकर भीतर जो विचार प्रवाहमान है, उस पर ध्यान धरें। यही एक रास्ता है, जहां से आप छठी इंद्रीय के बोध को हासिल कर सकते हैं। यकीनन, जो छठी इंद्रीय के निर्देशों को पकड़ने में उस्ताद होते हैं, वे सामान्य लोगों से ज्यादा सफल होते हैं। क्या ऐसा हम भी कर सकते हैं?
कुछ मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यह गुण जन्मजात होता है, तो कुछ के अनुसार इसे साधा जा सकता है। संतों के मुताबिक, इसे प्रतिभा, स्थिरता, दृढ़ता और अभ्यास से हासिल किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के प्रयोगों ने पाया कि इसे सहज विकसित करके पाया जा सकता है। यह सहज हासिल है बस आपको। अपनी पांचों इंद्रीय को परे रखकर मन की दुनिया में उतरना होगा और वहां के संकेतों को समझने की कोशिश करनी होगी। गीता  में बहुत पहले भगवान कृष्ण ने कहा- मुझमें ध्यान लगाओ, आंखें बंद करो और मेरे मोरपंख पर ध्यान धरो, मेरे रंग, मेरे नयन पर ध्यान धरो, तुम्हें वह मिल जाएगा, जो तुम हासिल करना चाहते हो।  उन्होंने चित्त को शांत कर उसकी बात सुनने को कहा। चित्त शांत दो तरह से हो सकता है, ध्यान धरकर या फिर प्रकृति के करीब जाकर। दोनों मस्तिष्क और मन की दुनिया को एकाकार करते हैं। यह आंतरिक अनुभव को फलीभूत करता है, जिसे पाना खुद को पाने सा है। ओशो तो कहते हैं कि तुम्हारा छठा बोध ही दरअसल तुम्हारा पहला जागृत बोध है। इसे पा लो, तो राह भी आसान होगी और निर्णय भी सधे होंगे।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Mansa vacha karmana article of hindustan on 18 april