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हंसी जिंदगी है

आप बहुत परेशानी में हों, तनाव में हों या किसी समस्या के समाधान का रास्ता तलाश रहे हों। ऐसे में, जब कुछ सूझ न रहा हो, तब आप जैसे ही किसी मासूम बच्चे को मुस्कराते देखते हैं, अगले ही पल आपकी परेशानी या तनाव या समस्या कम होती दिखती है। मैरीलैंड बॉल्टीमोर विश्वविद्यालय के न्यूरो बायोलॉजिस्ट डॉ रॉबर्ट बॉबिने ने अपनी रिसर्च लाफिंग थेरेपी  के दौरान ऐसा ही पाया। अगर बचपन से ही खिलखिलाने और ठहाके की आदत डाल ली जाए, तो आगे चलकर आप अनिद्रा, अवसाद जैसी बीमारियों से आसानी से अपना बचाव कर सकते हैं। डॉ बॉबिने मानते हैं कि कुछ लोग खुशमिजाज नहीं होते। कुछ अपनी हंसी पर पाबंदी लगा लेते हैं। आप किसी से न खुलकर मिल पाते हैं और न दिल की बातें कर पाते हैं। ऐसे लोगों को खुद पर हंसने की कोशिश करनी चाहिए, इससे आपको गिरकर उठने की शक्ति मिलती है। आप हल्का महसूस करते हैं। 
हंसी के संदर्भ में महात्मा गांधी का कहना है कि हंसी मन की गांठें बड़ी सरलता से खोल देती है। मेरे मन की ही नहीं, आपके मन की भी। जबकि जॉर्ज बर्नार्ड शॉ मानते थे कि हंसी के ठहाकों पर यौवन के फूल खिलते हैं। हंसी एक अचूक दवा है, जिसे प्रकृति ने मुफ्त उपहार स्वरूप दिया है। इसलिए कामों के बीच भी फुरसत के कुछ पल निकालकर अपने साथियों के साथ हंसी-मजाक जरूर कर लिया लीजिए। सद्गुरु कहते हैं कि जो इंसान खुलकर हंस नहीं सकता, वह ध्यान भी नहीं कर सकता। हंसी, एक तरह  से आपकी ऊर्जा का उमड़ना है। बिना किसी शारीरिक गतिविधि के आपकी ऊर्जा का शिखर तक उमड़ना ही ध्यान है। 

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  • Web Title:Mansa vacha karmana article of hindustan on 13 may